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गर्भवती के लिए जानलेवा है यह रोग, जानिए क्या है इसके लक्षण

Sat, 16 Jan 2021 04:13 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : shutterstock
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गर्भवती, धात्री और पांच वर्ष तक बच्चों में एनीमिया की पहचान और उसका उपचार बेहद जरूरी है। इसे लेकर भारत सरकार की ओर से एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत निशुल्क आईएफए (आयरन फॉलिक एसिड) संपूर्ण कार्यक्रम चलाया जा रहा है।

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अगर किसी गर्भवती में हीमोग्लोबिन का स्तर 11 ग्राम प्रति डेसीलिटर या उससे अधिक है तो चिंता की बात नहीं है, लेकिन अगर यह स्तर 11 ग्राम प्रति डेसीलिटर से कम है तो वह एनीमिया की चपेट में आ रहा है।

जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी केएन बरनवाल ने बताया कि लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से 60 ब्लॉक स्तरीय लोग प्रशिक्षित किए गए हैं। यह लोग गांव-गांव संदेश पहुंचाएंगे। बताया कि गर्भवती में हीमोग्लोबिन का स्तर 10 से 10.9 ग्राम प्रति डेसीलिटर होने पर माइल्ड एनीमिया, सात से 9.9 ग्राम प्रति डेसीलिटर होने पर मॉडरेट एनीमिया और अगर यह सात से भी कम है तो गंभीर एनीमिया का लक्षण है।

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माइल्ड और मॉडरेट एनीमिया के मामले में आईएफए की दो गोली रोजाना दी जाती है। प्रत्येक गर्भवती की एनीमिया की जांच प्रसव पूर्व जांच के दौरान ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस (वीएचएनडी) सत्र में होना चाहिए। यह जांच एएनएम के पास उपलब्ध डिजीटल हीमोग्लोबिन मीटर अथवा कलर स्ट्रीप के माध्यम से होता है।

आईएफए की गोली देने के साथ यह भी बताया जाता है कि इसके सेवन के बाद विटामिन-सी से भरपूर पदार्थ जैसे नींबू पानी, संतरे का जूस आदि का सेवन करें। गोली खाने के एक घंटे तक चाय या कॉफी का सेवन बिल्कुल न करें।
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