गर्भवती, धात्री और पांच वर्ष तक बच्चों में एनीमिया की पहचान और उसका उपचार बेहद जरूरी है। इसे लेकर भारत सरकार की ओर से एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत निशुल्क आईएफए (आयरन फॉलिक एसिड) संपूर्ण कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
अगर किसी गर्भवती में हीमोग्लोबिन का स्तर 11 ग्राम प्रति डेसीलिटर या उससे अधिक है तो चिंता की बात नहीं है, लेकिन अगर यह स्तर 11 ग्राम प्रति डेसीलिटर से कम है तो वह एनीमिया की चपेट में आ रहा है।
जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी केएन बरनवाल ने बताया कि लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से 60 ब्लॉक स्तरीय लोग प्रशिक्षित किए गए हैं। यह लोग गांव-गांव संदेश पहुंचाएंगे। बताया कि गर्भवती में हीमोग्लोबिन का स्तर 10 से 10.9 ग्राम प्रति डेसीलिटर होने पर माइल्ड एनीमिया, सात से 9.9 ग्राम प्रति डेसीलिटर होने पर मॉडरेट एनीमिया और अगर यह सात से भी कम है तो गंभीर एनीमिया का लक्षण है।