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इस बार दो दिन मनाई जाएगी अनंत चतुर्दशी, तिथि को लेकर असमंजस में है लोग

Mon, 31 Aug 2020 04:50 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
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तिथि को लेकर एकमत नहीं हैं पंडित-ज्योतिषाचार्य - फोटो : अमर उजाला।
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अनंत फल की प्राप्ति एवं कष्टों के निवारण के लिए श्रद्धालु अनंत चतुर्दशी का व्रत रखेंगे, लेकिन इस बार तिथि को लेकर असमंजस की स्थिती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि दो प्रमुख पंचांगों में इसकी तिथि अलग-अलग बताई गई है। हृषीकेश पंचांग के अनुसार सोमवार जबकि महावीर पंचांग के अनुसार मंगलवार को यह पर्व मनाया जाएगा। इसकी वजह से पंडित-ज्योतिषाचार्यों में भी असमंजस की स्थिति है। कोई इस पर्व को मनाने के लिए सोमवार का दिन उपयुक्त बता रहा है तो कोई मंगलवार का। ऐसे में इस बार यह पर्व दो दिन मनाया जाएगा।

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पंडित शरद चंद्र मिश्र एवं पंडित डॉ. जोखन पांडेय शास्त्री के अनुसार, इस दिन त्रयोदशी तिथि का मान सुबह आठ बजकर 30 मिनट तक, पश्चात चतुर्दशी तिथि, श्रवण नक्षत्र दिन में तीन बजकर 52 मिनट तक, पश्चात धनिष्ठा नक्षत्र, शोभन योग के साथ ही इस दिन सिद्धि नामक महा औदायिक योग भी है। चंद्रमा की स्थिति मकर राशि पर है।

मध्याह्न समय में चतुर्दशी तिथि के विद्यमान होने से अनंत चतुर्दशी व्रत के लिए यही दिन योग्य रहेगा। वहीं ज्योतिषाचार्य पंडित बृजेश पांडेय एवं ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार, मंगलवार को उदय काल से लेकर तीन मुहूर्त तक व्याप्त चतुर्दशी में इसको करने का शास्त्र सम्मत प्रमाण है।

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अनंत चतुर्दशी माहात्म्य

पंडित बृजेश पांडेय के अनुसार, यह व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल चतुर्दशी को किया जाता है। इस व्रत को करने और अनंत भगवान विष्णु का पूजन करने से व्रती की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। कष्टों से मुक्ति मिलती है और उसके समस्त पाप तिरोहित हो जाते हैं। इसको अनंत इसलिए माना जाता है, क्योंकि इस व्रत में अनंत का तो पूजन होता ही है, साथ ही इसका फल भी अनंत है। व्रती इस व्रत को धन-धान्य, पुत्रादि की कामना से करते हैं।

पूजन विधि
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, व्रती को सुबह शुद्ध जल या गंगाजल से स्नान कर भगवान अनंत (विष्णु) का ध्यान करना चाहिए। पुन: सर्वतोभद्र मंडल बनाकर उस पर कलश की स्थापना करें। उसके बाद अक्षत, दूर्वा तथा शुद्ध सूत को हल्दी से रंगें और चौदह गांठ के अनंत को सम्मुख रखकर पूजन और हवन करें। उसके बाद भगवान का ध्यान करते हुए सूत से बने उस अनंत को व्रती अपनी भुजा पर बांध ले। यदि पुराना अनंत बंधा हो तो उसे निकाल दें। यह नया अनंत वर्ष पर्यंत के लिए फलदायी सिद्ध होगा। ब्राह्मण या पुरोहित को सम्मान पूर्वक भोजन कराएं और सामर्थ्य के अनुसार दान-दक्षिणा देकर विदा करें। इसके बाद नमक रहित भोजन स्वयं ग्रहण करें।

आज ही होगा गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन
अनंत चतुर्थी से शुरू हुए गणेश उत्सव का समापन सोमवार को गणेश चतुर्दशी के दिन हो जाएगा। विद्वानों के अनुसार, इस दिन सुबह आठ बजकर तीन मिनट के बाद चतुर्दशी तिथि लग जा रही है, ऐसे में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए सोमवार का दिन ही उपयुक्त रहेगा।
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