31 जनवरी 1986 में केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे। उत्तर प्रदेश में भी उस वक्त कांग्रेस की सरकार थी। वीर बहादुर मुख्यमंत्री थे। यूपी के फैजाबाद के एक वकील उमेश चंद्र ने राम मंदिर का ताला खुलवाने के लिए जिला अदालत में एक याचिका दायर कर रखी थी। याचिका को मंजूर करते हुए गोरखपुर के अलहदादपुर निवासी तत्कालीन जज कृष्ण मोहन पांडेय ने मंदिर का ताला खोलने का आदेश दे दिया।
इसके बाद एक फरवरी को राम मंदिर के ताले 37 साल बाद से जो बंद पड़े थे खोल दिए गए थे। फिर मंदिर को बनवाने की के लिए चले आंदोलन की कमान गोरखनाथ मंदिर के पीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ ने संभाल ली थी। साधु-संतों को एक मंच पर लाकर महंत अवेद्यनाथ ने पूरे देश में एक माहौल बनाया। अयोध्या में राम मंदिर के बनने पर गोरक्षनगरी के लोगों को भी गर्व है। सोमवार को दिवाली जैसा भव्य उत्सव शहर में देखने को मिला, जैसे अवध से वाकई राम आए हैं।
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ये गुरू गोरखनाथ का है प्रताप
आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र कुमार गुप्ता ने कहा कि गुरु गोरक्षनाथ की धरती ने ऐसे वीर सपूतों को जन्म दिया है, जिन्होंने अयोध्या के आंदोलन को नई धार दी। ये सही है कि गोरक्षनगरी के ही रहने वाले जज और सीएम वीर बहादुर के समय में मंदिर का ताला खुला और आज सीएम के रूप में योगी आदित्यनाथ हैं। पूरे आंदोलन को भी देखेंगे तो गोरखपुर के लोगों का बड़ा योगदान है।
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हर आंदोलन में गोरक्षनगरी ही अहम
वरिष्ठ अधिवक्ता शंकर शरण त्रिपाठी ये हम लोगों के लिए गौरव का विषय है। अयोध्या का आंदोलन हो या फिर आजादी की लड़ाई हर बार गोरखपुर के सपूतों ने अहम भूमिका निभाई। जब हिंदुओं को मंदिर में घुसने नहीं दिया रहा था, तब गोरखपुर के जज ने फैसला लिया और सीएम भी गोरखपुर के ही थे। प्राण प्रतिष्ठा हुआ तो सीएम गोरखपुर के ही हैं।