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UP News: मधुमिता हत्याकांड से खत्म हो गया था अमरमणि का राजनीतिक सफर, बेटे अमन ने संभाली विरासत

Sat, 26 Aug 2023 11:00 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

लखनऊ में निशातगंज स्थित पेपर मिल कॉलोनी में 9 मई 2003 को सात महीने की गर्भवती कवयित्री मधुमिता शुक्ला की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्याकांड के वक्त बसपा की सरकार थी और अमरमणि मंत्री थे। इसी हत्याकांड में उम्रकैद की सजा हुई।
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बाएं से अमनमणि और अमरमणि त्रिपाठी। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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कवयित्री मधुमिता शुक्ला से प्रेम और फिर उसकी हत्या में नाम आने के बाद अमरमणि त्रिपाठी का राजनीतिक जीवन सफर खत्म हो गया। कद्दावर नेता की छवि रखने वाले अमरमणि जेल के सलाखों के पीछे पहुंच गए। बेटे अमनमणि ने राजनीतिक विरासत संभाली, लेकिन विधायक रहने के दौरान ही कार हादसे में उनकी पत्नी सारा की मौत हो गई। इस मामले में हत्या का केस दर्ज होने के बाद अमनमणि को जेल जाना पड़ा।

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जानकारी के मुताबिक, लखनऊ में निशातगंज स्थित पेपर मिल कॉलोनी में 9 मई 2003 को सात महीने की गर्भवती कवयित्री मधुमिता शुक्ला की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्याकांड के वक्त बसपा की सरकार थी और अमरमणि मंत्री थे। इसी हत्या में उन्हें उम्रकैद की सजा हो गई।

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मधुमिता के परिवार की तरफ से दर्ज कराए गए केस में अमरमणि त्रिपाठी, उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी, भतीजे रोहितमणि त्रिपाठी, संतोष राय और पवन पांडेय को आरोपी बनाया गया।

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सीबीसीआईडी ने 20 दिन की जांच के बाद मामला सीबीआई को सौंपा। गवाहों से पूछताछ हुई तो दो ने बयान बदले थे। अमरमणि को सजा दिलाने के लिए मधुमिता की बहन सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। उन्होंने याचिका दायर करते हुए केस को लखनऊ से दिल्ली या तमिलनाडु ट्रांसफर करने की अपील की।

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कोर्ट ने 2005 में केस उत्तराखंड ट्रांसफर कर दिया। 24 अक्तूबर 2007 को देहरादून सेशन कोर्ट ने पांचों लोगों को उम्र कैद की सजा सुनाई। अमरमणि त्रिपाठी नैनीताल हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट गए, लेकिन सजा बरकरार रही।





 
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