सीबीसीआईडी ने 20 दिन की जांच के बाद मामला सीबीआई को सौंपा। गवाहों से पूछताछ हुई तो दो ने बयान बदले थे। अमरमणि को सजा दिलाने के लिए मधुमिता की बहन सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। उन्होंने याचिका दायर करते हुए केस को लखनऊ से दिल्ली या तमिलनाडु ट्रांसफर करने की अपील की।
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कोर्ट ने 2005 में केस उत्तराखंड ट्रांसफर कर दिया। 24 अक्तूबर 2007 को देहरादून सेशन कोर्ट ने पांचों लोगों को उम्र कैद की सजा सुनाई। अमरमणि त्रिपाठी नैनीताल हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट गए, लेकिन सजा बरकरार रही।