मामला लटकता देख कर्मचारी नेता अजय शाही ने पूरी बात एक बार फिर अमर उजाला से संपर्क कर साझा की। नौकरी में मेडिकल बोर्ड की अड़चन आने की बात बताई। इसके बाद सीएमओ से संपर्क कर पूरी बात बताई गई। सीएमओ ने 18 जून को मेडिकल बोर्ड का गठन किया। राहुल खान का परीक्षण होने के बाद उनकी जांच रिपोर्ट चौरीचौरा खंड को भेजी गई। इस रिपोर्ट में चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद माना कि राहुल खान काम करने योग्य हैं। हालांकि, वह दिव्यांग होने की वजह से सीढ़ी पर चढ़ने के अलावा शारीरिक परीक्षण का काम करने में असमर्थता जता सकते हैं।
मुख्य अभियंता ने रिपोर्ट परखी, की नियुक्ति
मुख्य अभियंता एके सिंह के सामने जब से मामला आया तो उन्होंने हैरत जताई। बिजली कर्मी का आश्रित वह भी दिव्यांग और वह नौकरी के लिए चार वर्ष से भटक रहा था। जानकारी होने पर उन्होंने पत्रावलियों को तलब किया। सभी जरूरी कागजात की जांच-पड़ताल की। दो दिन पहले राहुल खान को अपने दफ्तर बुलाकर बिजली निगम के नियमों की जानकारी, उसके ऊपर आश्रित दोनों बहनों की जिम्मेदारी उठाने की बात शपथ में लेने के बाद उसकी नियुक्ति कर दी।
हिम्मत हार चुके थे, उमर उजाला ने दी ताकत
श्रमिक पद पर नियुक्ति होने के बाद दिव्यांग राहुल खान की आंखों में खुशी थी। बहनें सोनी और मुस्कान ने बताया कि नौकरी नहीं होने से परिवार के भरण-पोषण के लिए दूसरों के घरों का काम भी करना पड़ता था। हम उम्मीद हार चुके थे कि हमारे परिवार में पढ़ा-लिखा और जिम्मेदार दूसरा कोई नहीं है। भाई खुद दिव्यांग है तो वह लड़ाई भी कैसे लड़ेगा? कर्मचारी नेता अजय शाही ने अमर उजाला से संपर्क करवाया। इसके बाद जब पत्रावलियां फिर से निगम की तरफ से मांगी जाने लगीं तो उम्मीद बंध गई। इसी का नतीजा है कि आज भाई को उसका अधिकारी मिल गया।