पर्यावरण के लिए पेड़-पौधों के साथ जीव-जंतु बेहद जरूरी हैं। मौजूदा दौर में दोनों की अनदेखी पर चिंता जाहिर करते हुए दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने चेताया कि अगर हम अब भी नहीं संभले तो मानव जीवन गंभीर संकट में पड़ सकता है।
छात्रों में होनी चाहिए इतिहास को जानने की जिज्ञासा : प्रो. जेपी सैनी
मदनमोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने छात्र- छात्राओं को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करते हुए इतिहास से सदैव सबक लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मानव जीवन के लिए प्राकृतिक संसाधनों और जीव-जंतु के प्रति सकारात्मक नजरिया आज की जरूरत है।
बाएं से संजयन त्रिपाठी और अजय शाही।
- फोटो : अमर उजाला।
अमर उजाला का बाल मेला बहुत ही शानदार रहा। यह मेला बच्चों को संदेश दे गया। मेले के माध्यम से बच्चों ने जीव-जंतु को देखा और उन्हें पेपर पर उकेरा। सफल आयोजन के लिए बधाई।-अजय शाही, चेयरमैन आरपीएम एकेडमी ग्रुप
किसी भी कलाकार की सफलता के लिए मंच बहुत ही जरूरी है। अमर उजाला ने बच्चों को इतना बड़ा मंच देकर बहुत ही सराहनीय कार्य किया है, इसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए वह कम है।-संजयन त्रिपाठी, चेयरमैन नवल्स एकेडमी ग्रुप
बाएं से संजय जायसवाल और डॉ प्रकाश चंद्र।
- फोटो : अमर उजाला।
बच्चों को टेक्नोलॉजी से निकाल नेचर से जोड़ना सराहनीय बात है। इसकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है। बच्चों को नेचर से जुड़कर अच्छा लगा। अमर उजाला के बेहतरीन कार्यक्रम के लिए बधाई।-संजय जायसवाल, निदेशक संस्कृति पब्लिक स्कूल
बाल मेला बहुत ही शानदार आयोजन था। इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को जुटा पाना बड़ी बात थी। अमर उजाला ने ये कर दिखाया है। इस तरह के आयोजन से बच्चों के टैलेंट उभर कर सामने आता है।-डॉ. प्रकाश चंद्र शाही, पल्स हार्ट सेंटर
बाएं से संजीव कुमार और महेंद्र शुक्ल।
- फोटो : अमर उजाला।
बच्चों ने वन्य जीवों को इतने करीब से देखा। उनके द्वारा वन्य जीवों को पेपर पर उकेरना शानदार रहा। बच्चों को मनोरंजन के साथ रोचक जानकारियां मिलीं। अमर उजाला को बाल मेले की सफलता पर हार्दिक बधाई।-महेंद्र शुक्ला, निदेशक कैटलिस्ट
एक साथ इतने बड़ी संख्या में बच्चों को एक जगह पर स्थान देना बड़ी बात है। इस कार्यक्रम की जितनी भी तारीफ की जाए कम है। बाल मेला में बच्चों का भरपूर मनोरंजन हुआ और उन्हें जानकारी भी मिली।-संजीव कुमार, चेयरमैन एकेडमिक ग्लोबल स्कूल
बाएं से विश्वमित्र भट्ट और विक्की कुकरेजा।
- फोटो : अमर उजाला।
बाल मेले में आकर मैं अभिभूत हूं। इतनी ज्यादा संख्या में एक साथ आना और बहुत ही अनुशासित तरीके से बच्चों की मौज-मस्ती दिल को छू गई। ऐसे आयोजनों से बच्चों को वन्य जीवों के साथ-साथ पर्यावरण को जानने, समझने का सुंदर अवसर प्राप्त होता है। इस आयोजन के साथ गायन और नृत्य की प्रतियोगिता को शामिल करना और भी प्रशंसनीय रहा, बच्चों ने बहुत ही शानदार प्रदर्शन किया।-विश्वमित्र भट्ट, अध्यक्ष, लोक मंजरी
बाल मेला में जिस तरह बच्चों ने मस्ती की है, यह आयोजन की सार्थकता को प्रदर्शित करता है। इतनी ज्यादा संख्या में स्कूल के बच्चों ने इसमें भाग लिया। नृत्य और गीत में भी उनकी प्रस्तुति सराहनीय है।-विक्की कुकरेजा, कार्यकारी अध्यक्ष झूलेलाल सेवा मंडल
बाएं से वैभव सराफ और डॉ वाई सिंह।
- फोटो : अमर उजाला।
अपने शहर के बच्चे टीवी कलाकारों से कम नहीं हैं, अमर उजाला के बाल मेले में यह दिखा। छोटे बच्चों ने जब माइक संभाले और गीतों की प्रस्तुति दी तो मान कर रहा था कि बस सुनते ही रहें। सभी बच्चों ने बेहतरीन प्रतिभा का प्रदर्शन किया। ऐसे आयोजनों से बच्चों की प्रतिभा को एक प्लेटफार्म मिलता है।
-वैभव सराफ, निदेशक ऐश्प्रा जेम्स एंड ज्वेल्स।
वर्तमान में बच्चों में पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में ठोस जानकारी की कमी दिखती है। चिड़ियाघर खुलने के बाद कई स्कूल प्रबंधन की ओर से बच्चों में समझ बढ़ाने के लिए भेजना शुरू कर दिया गया है। लेकिन, इस कार्यक्रम से एक साथ कई स्कूलों के बच्चों को वन्य जीव और पर्यावरण संरक्षण की सीख मिली है।
-डॉ वाई सिंह, निदेशक संगम आई अस्पताल।
बाएं से आदित्य प्रताप, विशाल जायसवाल और सुशील ओझा।
- फोटो : अमर उजाला।
बाल मेले का आयोजन कर अमर उजाला ने इन बच्चों के एक मंच उपलब्ध करवाया है। यह स्कूली बच्चों की शिक्षा के लिए भी कारगर होगा। खुले मंच पर बच्चों ने नृत्य प्रस्तुति की तो सभी मंत्रमुग्ध रह गए। प्रस्तुति के दौरान उनके सहयोगी बच्चों ने भी उनका हौसला खूब बढ़ाया। ऐसे कार्यक्रम के लिए अमर उजाला को बधाई।-आदित्य प्रताप सिंह आगू, अध्यक्ष, भारतीय युवक संघ।
बाल मेला स्कूल के बच्चों के लिए शिक्षा और उत्साह का शानदार मंच रहा। बच्चों ने इस मंच से अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ पर्यावरणीय सीख भी ली। सभी बच्चों ने बेहतरीन प्रदर्शन किए। बच्चों के लिए सांस्कृतिक गायन, नृत्य, जादू, के साथ बच्चों के मनोरंजन के पूरे साधन उपलब्ध थे।-विशाल जायसवाल, निदेशक शिव मोटर्स।
चिड़ियाघर में पहली बार ऐसा कार्यक्रम देखने को मिला। ऐसे आयोजन से वन्य जीव और पर्यावरण के बारे में बच्चे अधिक जागरूक होंगे। कार्यक्रम में छोटे बच्चों की प्रतिभा भी दिखी। नृत्य, गायन, चित्रकारी, नाटक मंचन और अन्य विधाओं का मंचन एक ही स्थान पर, बेहद सुंदर और शानदार रहा।-सुशील ओझा, निदेशक वीणा सुधाकर ओझा ग्रुप ऑफ कॉलेज।