नारी गरिमा के सम्मान की शपथ लेतीं शिक्षिका व छात्राएं।
- फोटो : अमर उजाला।
बेटियां भी बेटों की तरह समाज में बराबरी की हकदार हैं। बावजूद इसके बेटा और बेटी में भेदभाव किया जा रहा है। इस भेद को खत्म करने के लिए समाज के सोच में परिवर्तन की जरूरत है। सरकार ने महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए कड़े कानून बनाए हैं। ऐसे में अगर आपके साथ कुछ गलत हो रहा है तो उसे बर्दाश्त न करें। महिला हेल्पलाइन पर फोन कर तुरंत पुलिस की मदद लें।
ये बातें महाराणा प्रताप बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य कृष्णा चटर्जी ने शुक्रवार को अमर उजाला की अपराजिता मुहिम के तहत आयोजित कार्यक्रम के दौरान कहीं। इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को नारी गरिमा के सम्मान की शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम में 500 से अधिक छात्राएं शामिल हुईं।
कार्यक्रम में सीनियर स्कूल समन्वयक सुमित गुप्ता ने कहा कि समाज में कुछ स्थानों पर लोग आज भी बेटा और बेटी में फर्क करते हैं। बेटे के जन्म पर खुशियां और बेटी के जन्म से परेशान हो जाते हैं। जबकि बेटियां हर क्षेत्र में माता-पिता का नाम रोशन कर रहीं हैं। लोगों को इस सोच को बदला चाहिए।
क्या बोलीं बेटियां
इनका रहा सराहनीय योगदान
कार्यक्रम के सफल आयोजन में दीपाली शर्मा, स्नेहलता सिंह, इंदिरा सिंह, राधा रानी पांडेय, कृष्णा मुरारी, संगीता राय, क्रांति सिंह, प्रिया तिवारी, कालिंदी शर्मा, रंभा सिंह, शशि प्रभा, जय लक्ष्मी पांडेय आदि ने सराहनीय भूमिका निभाई।
शिक्षा से ही आएगा बदलाव
शिक्षा और रोजगार के जरिये ही महिलाओं एवं लड़कियों की दशा में बदलाव आएगा। अपराजिता उन्हें ऐसा मंच प्रदान करेगी जहां से हम अपने बदलाव की कहानियां खुद लिखेंगे। - आयशा खातून, कक्षा 11,बी4
तय करना है लंबा रास्ता
समाज में लड़कियों की स्थिति में परिवर्तन आ रहा है। पर अब भी हमें बहुत लंबा रास्ता तय करना है। अभियान से जुड़कर लड़कियों की स्थिति में बदलाव लाया जा सकता है। - अदिति जायसवाल, कक्षा 11, ए2
समाज का सोच बदलना होगा
हमें खुद ही जागरूक होकर अपने हक के लिए आवाज उठानी होगी। इसमें महिलाओं को एक जुट रहने की जरूरत है। समाज के सोच में बदलाव लाने के लिए बेटियों को शिक्षित करना बेहद जरूरी है। - सृष्टि यादव, 9, बी1
लड़कियों को होना होगा जागरूक
ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों एवं महिलाओं की स्थिति बदलने के लिए महिला अधिकारों से जुड़े कार्यक्रमों की बहुत जरूरत है। इसके लिए हमें खुद जागरूक होकर आवाज उठानी होगी। - जया मौर्या, कक्षा- 11,बी 3