गोरखपुर में 50 लाख रुपयों के लालच में सरकारी नौकरी दांव पर लगाने वाला दरोगा आलोक सिंह अब जेल में करवटें बदल रहा है। चेहरे के भाव से उसके मन की चिंता तो झलकती है, लेकिन जब उससे कोई गलती पूछता है तो वह साफ इन्कार भी कर देता है।
वहीं, दो महीने पहले ही फरवरी में उसकी शादी हुई थी और अब उसके परिवार से करीबियों ने भी दूरी बना ली है। विभाग के लोग भी उसके परिवार से बातचीत करने में कतरा रहे हैं।
बेनीगंज पुलिस चौकी, जहां पर उसकी तैनाती थी, वहां के पुलिसकर्मी आज भी उसकी हरकतों पर चर्चा करते हुए उसे कोस रहे हैं। चौकी ही नहीं, उसकी एक करतूत की वजह से गोरखपुर पुलिस ही सवालों के घेरे में है और
सब यही कहते सुने जा रहे हैं कि जिस सरकारी नौकरी के लिए लोग लाखों रुपये देने को तैयार होते हैं, वही नौकरी एक गलती की वजह से दांव पर लग गई है।
जेल सूत्रों की माने तो पहले दिन तो वह चाय भी देरी से पिया था। महज आधा रोटी खाया, लेकिन अब वह खाना खा ले रहा है। वह पूरी तरह से गुमसुम रहता है। जेल प्रशासन के लोग उससे कुछ पूछने की कोशिश करते हैं तो वह जवाब नहीं देता है। बताया तो यह भी जा रहा है, जेल में एक ऐसे आरोपी से भी उसका आमना-सामना हो गया था, जिसे कुछ दिन पहले ही उसने जेल भेजा था और उसने दरोगा आलोक सिंह को चिढ़ा दिया था।
अब दोनों का आमना-सामना न होने पाए, इसकी भी कोशिश जेल प्रशासन कर रहा है। परिवार के कुछ लोगों के साथ पत्नी से बातचीत करने की उसने इच्छा जताई थी। जेल के पीसीओ से उसकी पत्नी के नंबर को सत्यापन के लिए भेजा गया है, ताकि वह बातचीत कर सके। जेल में पिछले कुछ दिनों के बीच उससे सिर्फ तीन लोग ही मिलने पहुंचे जो परिवार के ही बताए जा रहे हैं।
परिजनों के सामने छलक गए थे आंसू
उसे जेल में कपड़ा देने के लिए आए परिजनों से उसकी मुलाकात हुई तो उसके आंसू छलक गए। भाई उससे दो बार मुलाकात कर चुका है, उसे जरूरत का सामान उपलब्ध कराया, लेकिन भाई से भी वह कुछ ज्यादा बातचीत नहीं किया है। कल तक जिस भाई के वर्दी पर गर्व हुआ करता था, उसे जेल में देखने के बाद भाई की भी आंखें नम हो गई थी।