गोरखपुर। अक्षय तृतीया का पावन पर्व 20 अप्रैल, सोमवार को अत्यंत शुभ तीन योगों में मनाया जाएगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और रवि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे धार्मिक कार्यों, दान-पुण्य और शुभ खरीदारी का महत्व कई गुना बढ़ जाएगा।
बेतियाहाता हनुमान मंदिर के महंत राम नारायण त्रिपाठी के अनुसार सनातन परंपरा में वैशाख शुक्ल तृतीया का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन किए गए स्नान, दान, जप और हवन का फल अक्षय यानी कभी समाप्त न होने वाला होता है। यही कारण है कि इस दिन सोना-चांदी की खरीदारी को अत्यंत शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन त्रेता युग का आरंभ हुआ था। वहीं ज्योतिर्विद जोखन पांडेय ने बताया कि ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष नर-नारायण जयंती और परशुराम जयंती 19 अप्रैल को मनाई जाएंगी, क्योंकि तृतीया तिथि मध्यान्ह से पूर्व उसी दिन प्रारंभ हो रही है। अक्षय तृतीया न केवल आस्था और श्रद्धा का पर्व है, बल्कि शुभ कार्यों की शुरुआत, समृद्धि और सुख-शांति के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।