पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया के नाम से जाना जाता है।यह सनातन धर्मियों का प्रधान त्योहार है। इस दिन दिए हुए दान और किए हुए स्नान, होम, जप आदि सभी कर्मों का फल अनंत होता है। सभी अक्षय हो जाते हैं, इसी से इसका नाम अक्षय हुआ है। इस दिन परशुराम जयंती भी मनाई जाएगी। बताया कि ऐसी मान्यता है कि इसी दिन त्रेतायुग का आरंभ हुआ था।
सोना खरीदने का है विशेष महत्व
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन सोने के आभूषण खरीदने की परंपरा होती है। ऐसा कहा जाता है इस दिन पर खरीदारी करने पर इसका कभी क्षय नहीं होता है। अक्षय तृतीया पर सूर्य और चंद्रमा दोनों ही ग्रह अपनी उच्च राशि में मौजूद होते हैं जिसका शुभ प्रभाव होता है। अक्षय तृतीया पर मां लक्ष्मी की विशेष रूप से पूजा आराधना करने की परंपरा है।