गोरखपुर शहर को प्रदूषित करने वाले हर एक कारक का विवरण तैयार होगा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा गोरखपुर शहर को नॉन अटेनमेंट (सामान्य से खराब वायु गुणवत्ता) शहरों की सूची में शामिल करने के बाद सभी विभागों को शहर को प्रदूषित करने वाले कारकों का विवरण तैयार करने का निर्देश दिया है। अभी हाल में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गोरखपुर और मदुरई को प्रदूषित शहरों की श्रेणी में शामिल किया है।
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इसके अंतर्गत नगर निगम और जीडीए शहर के सभी होटल, बैंक्विट हॉल, मॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स समेत अन्य सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले जेनरेटर सेट की क्षमता और उसमें खपत होने वाले डीजल का विवरण तैयार करेंगे। साथ ही इन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का नाम-पता, अक्षांश और देशांतर के साथ विवरण तैयार करना है। नगर निगम को शहर में स्थित सॉलिड वेस्ट प्वॉइंट, गोरखपुर विकास प्राधिकरण को शहर में होने वाले सभी बड़े निर्माण कार्यों का विवरण तैयार करना है।
नगर निगम, गीडा और लोक निर्माण विभाग को शहर में लगे हॉट मिक्स प्लांट, तो नगर निगम और जीडीए को शहर में लगे कंकरीट मिक्सिंग प्लांट की भी रिपोर्ट तैयार करनी है। कृषि विभाग को स्टेबल बर्निंग प्वाइंट तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को शहर के ट्रैफिक हॉटस्पॉट, औद्योगिक क्षेत्र में होने वाले प्रदूषण, रिहायशी और व्यावसायिक इलाकों के प्रदूषण और जाम की रिपोर्ट तैयार करनी है। संभागीय परिवहन विभाग को शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर लगने वाले जाम और वाहनों की संख्या की जानकारी देनी है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को टोल पर गाड़ियों की संख्या का ब्योरा देना है।
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19 विभागों को दी गई है जिम्मेदारी
गोरखपुर शहर को प्रदूषित करने वाले विभिन्न कारकों की रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी 19 विभागों को दी गई है। इनमें नगर निगम, गोरखपुर विकास प्राधिकरण, गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण, यातायात विभाग, संभागीय परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग, उद्यान विभाग, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, उद्योग विभाग, जल निगम, कृषि विभाग, जिला पूर्ति विभाग, जिला शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, नेडा, उतर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को शामिल किया गया है।
15 दिसंबर तक उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजी जानी है रिपोर्ट
गोरखपुर नगर की वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए विस्तृत कार्य योजना तैयार कर 15 दिसंबर तक उतर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को रिपोर्ट भेजी जानी है। यह रिपोर्ट प्रदेश के पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में गठित एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग कमिटी से अनुमोदन के बाद केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजी जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर गोरखपुर शहर में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा।
प्रदेश के 15 शहर पहले से नॉन अटेनमेंट सिटी की सूची में हैं शामिल
नॉन अटेनमेंट सिटी ऐसे शहरों को कहा जाता है जहां प्रदूषण का स्तर मानक से अधिक होता है देश के विभिन्न राज्यों के 122 शहर पहले से इस सूची में शामिल हैं। उत्तर प्रदेश के 15 शहर भी इस श्रेणी में पहले से हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसी महीने गोरखपुर को भी इस सूची में शामिल कर लिया है।
गोरखपुर के अलावा प्रदेश के आगरा, इलाहाबाद, अनपरा, बरेली, फिरोजाबाद, गजरौला, गाजियाबाद, झांसी, कानपुर, खुर्जा, लखनऊ, मुरादाबाद, नोएडा, रायबरेली और वाराणसी पहले से नॉन अटेनमेंट सिटी हैं। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक सहायक राम मिलन वर्मा ने बताया कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रमुख सचिव ने इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए डीएम की अध्यक्षता में कमेटी गठित की है और गोरखपुर के प्रभागीय वन अधिकारी को इसका समन्वयक बनाया गया है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी पंकज यादव ने बताया कि शहर के प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए दो चरणों में काम होना है। पहला इनवेंट्री का काम मिला है, उसे एक सप्ताह में पूरा करना है। फिर एक्शन प्लान बनाना है, उसे 15 दिसंबर तक पूरा करके उत्तरप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दे देना है। जहां से उसे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजा जाएगा।