फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अनलॉक: छूट मिली तो बिगड़ी हवा की गुणवत्ता, दीपावली तक तीन गुना बढ़ सकते हैं ये आंकड़े

Mon, 05 Oct 2020 12:23 PM IST
vivek shukla राजन राय, गोरखपुर।

सार

  • मानक से ज्यादा हो गया पीएम-10 और एक्यूआई
  • लॉकडाउन में बेहद अनुकूल हो गया था पर्यावरण
विज्ञापन
गोरखपुर में अनलॉक के दौरान की तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अनलॉक में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के आवासीय, व्यावसायिक व औद्योगिक क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता बिगड़ने लगी है। यह कहीं मध्यम तो कहीं खराब श्रेणी में दर्ज की गई है। पीएम-10 (पार्टिकुलेट मैटर) और एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) की स्थिति ज्यादा गड़बड़ है। हाल ऐसा ही रहा तो दीपावली तक ये आंकड़े तीन गुना तक बढ़ सकते हैं।

विज्ञापन


शहर में वायु प्रदूषण की जांच हर महीने होती है। एमएमएमयूटी के प्रो. गोविंद पांडेय की देखरेख में तीन क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता देखी जाती है, फिर रिपोर्ट शासन को भेजी जाती है। इसके मुताबिक फरवरी, मई और अगस्त में वायु प्रदूषण कम हुआ था।

अनलॉक शुरू हुआ तो वायु प्रदूषण बढ़ने लगा। प्रो. गोविंद पांडेय के मुताबिक अभी आवासीय क्षेत्र में वायु प्रदूषण मानक से थोड़ा ज्यादा, व्यावसायिक क्षेत्र में मध्यम और औद्योगिक क्षेत्र में खराब तक पहुंच गया है। इसमें पीएम-10 सबसे ज्यादा बढ़ा है। इसके स्रोत वाहनों से निकलने वाले धुएं, पराली या कोयला जलने और उद्योगों की चिमनियां हैं।

विज्ञापन

सप्ताह में दो बार यहां हुई है जांच

गोरखपुर में लॉकडाउन के दौरान की तस्वीर।(फाइल) - फोटो : अमर उजाला।
एमएमएमयूटी परिसर, जलकल भवन गोलघर व गीडा।
 
मई में वायु की गुणवत्ता की स्थिति (माइक्रो घनमीटर में)
क्षेत्र               पीएम-10   एसओटू  एनओटू    एक्यूआई  
आवासीय          44.46     1.47       3.98           45            
व्यावसायिक       78.64     2.25       6.97          78  
औद्योगिक         132.24   10.14     18.40        121
 
अगस्त में वायु की गुणवत्ता की स्थिति (माइक्रो घनमीटर में)
क्षेत्र                पीएम-10   एसओटू   एनओटू   एक्यूआई  
आवासीय          72.63        1.39      3.29       73            
व्यावसायिक       113.78     4.51      9.88       109  
औद्योगिक         204.62     13.77     23.81     170
विज्ञापन

यह है स्टैंडर्ड मानक

  • सल्फर डाई ऑक्साइड (एसओटू) = 50 माइक्रो घनमीटर
  • नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड (एनओटू): 40 माइक्रो घनमीटर
  • पीएम-10 (पार्टिकुलेट मैटर) : 60 माइक्रो घनमीटर
 
एक्यूआई का मानक
0 से 50 - अच्छा
51 से 100- संतोषजनक
101 से 200- मध्यम
201 से 300-खराब
301 से 400- बेहद खराब
401 से 500- गंभीर
 
एसओटू बढ़ने से नुकसान
सल्फर डाईऑक्साइड बढ़ने से फेफड़े पर असर पड़ेगा, सांस की बीमारी होगी। एलर्जी की समस्या बढ़ेगी।
 
एमएमएमयूटी के प्रोफेसर गोविंद पांडेय ने बताया कि लॉकडाउन में वायु की गुणवत्ता काफी अच्छी हो गई थी, लेकिन अनलॉक में वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। एसओटू का लेवल कम करने के लिए वाहनों की अधिकता पर रोक जरूरी है। ट्रैफिक व्यवस्था ठीक हो ताकि जाम न लगे और गैस का उत्सर्जन कम हो। बैट्री चलित वाहनों का ज्यादा इस्तेमाल किया जाना चाहिए। अगर अभी सचेत नहीं हुए तो पिछले वर्ष जैसे हालात हो जाएंगे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें