गोरखपुर में लॉकडाउन के दौरान की तस्वीर।(फाइल)
- फोटो : अमर उजाला।
एमएमएमयूटी परिसर, जलकल भवन गोलघर व गीडा।
मई में वायु की गुणवत्ता की स्थिति (माइक्रो घनमीटर में)
क्षेत्र पीएम-10 एसओटू एनओटू एक्यूआई
आवासीय 44.46 1.47 3.98 45
व्यावसायिक 78.64 2.25 6.97 78
औद्योगिक 132.24 10.14 18.40 121
अगस्त में वायु की गुणवत्ता की स्थिति (माइक्रो घनमीटर में)
क्षेत्र पीएम-10 एसओटू एनओटू एक्यूआई
आवासीय 72.63 1.39 3.29 73
व्यावसायिक 113.78 4.51 9.88 109
औद्योगिक 204.62 13.77 23.81 170
- सल्फर डाई ऑक्साइड (एसओटू) = 50 माइक्रो घनमीटर
- नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड (एनओटू): 40 माइक्रो घनमीटर
- पीएम-10 (पार्टिकुलेट मैटर) : 60 माइक्रो घनमीटर
एक्यूआई का मानक
0 से 50 - अच्छा
51 से 100- संतोषजनक
101 से 200- मध्यम
201 से 300-खराब
301 से 400- बेहद खराब
401 से 500- गंभीर
एसओटू बढ़ने से नुकसान
सल्फर डाईऑक्साइड बढ़ने से फेफड़े पर असर पड़ेगा, सांस की बीमारी होगी। एलर्जी की समस्या बढ़ेगी।
एमएमएमयूटी के प्रोफेसर गोविंद पांडेय ने बताया कि लॉकडाउन में वायु की गुणवत्ता काफी अच्छी हो गई थी, लेकिन अनलॉक में वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। एसओटू का लेवल कम करने के लिए वाहनों की अधिकता पर रोक जरूरी है। ट्रैफिक व्यवस्था ठीक हो ताकि जाम न लगे और गैस का उत्सर्जन कम हो। बैट्री चलित वाहनों का ज्यादा इस्तेमाल किया जाना चाहिए। अगर अभी सचेत नहीं हुए तो पिछले वर्ष जैसे हालात हो जाएंगे।