- एम्स पहली बार इन्फ्लेमेट्री बाउल डिजीज का हुआ इलाज
गोरखपुर। एम्स में एक जटिल और गंभीर आंत संबंधी बीमारी के इलाज में बड़ी सफलता मिली है। संस्थान में पहली बार इन्फ्लेमेट्री बाउल डिजीज (आईबीडी) से पीड़ित एक किशोर का सफल सर्जिकल उपचार किया गया। करीब 10 महीने तक चले इलाज में तीन चरणों में सर्जरी कर मरीज को राहत दिलाई गई।
बहराइच निवासी किशोर लंबे समय से इस बीमारी से जूझ रहा था। उसकी आंतों में लगातार सूजन हो रही थी, जिससे पेट फूलना और भोजन का सही तरीके से पाचन न होना जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही थीं। गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग की ओर से दी जा रही दवाएं भी असर नहीं कर रही थीं। इसके चलते सर्जरी ही एकमात्र विकल्प बचा।
एम्स के जनरल सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता ने बताया कि मरीज की हालत लगातार बिगड़ रही थी, इसलिए विशेषज्ञों की संयुक्त टीम बनाकर सर्जरी का निर्णय लिया गया। इस दौरान किशोर की बड़ी आंत को निकालना पड़ा और छोटी आंत से मल द्वार तक एक नया मार्ग (पाउच) तैयार किया गया, ताकि पाचन प्रक्रिया सामान्य रूप से संचालित हो सके।
गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के डॉ. सौरभ केडिया ने बताया कि आईबीडी का इलाज हर बार दवाओं से संभव नहीं होता। जब दवाएं विफल हो जाती हैं, तब सर्जरी आवश्यक हो जाती है। इस जटिल ऑपरेशन में जनरल सर्जरी, एनेस्थीसिया और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग की संयुक्त टीम ने काम किया। सर्जरी टीम में डॉ. रवि गुप्ता, डॉ. आशीष मिश्रा, डॉ. स्वाति और डॉ. हर्षा जागनानी शामिल रहे, जबकि एनेस्थीसिया टीम में डॉ. संतोष, डॉ. भूपेंद्र और डॉ. नीरज ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब इलाज का पहला चरण अक्तूबर 2025 में शुरू हुआ और अंतिम सर्जरी मई 2026 में पूरी की गई। वर्तमान में मरीज की हालत में काफी सुधार है।