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गोरखपुर एम्स: इमरजेंसी में मरीज को नहीं किया भर्ती, तीमारदारों ने किया हंगामा- OPD पर्ची फाड़ने का आरोप

Sat, 06 Dec 2025 01:29 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर

सार

कृष्णा ने बताया कि रात करीब आठ बजे वे दिवाकर को लेकर एम्स की इमरजेंसी पहुंचे लेकिन जूनियर डॉक्टरों ने इलाज करने से मना कर दिया। आरोप है कि डॉक्टर ने गाली-गलौज की और पर्चा फेंक दिया। इसके बाद उन्होंने डायल 112 पर कॉल किया। पुलिस के पहुंचने पर मामले को शांत कराया गया और तब इलाज शुरू किया गया।
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एम्स की इमरजेंसी - फोटो : स्त्रोत- सोशल मीडिया
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विस्तार
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एम्स की इमरजेंसी में शुक्रवार की रात तीमारदारों ने हंगामा कर दिया। आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद जूनियर डॉक्टरों ने मरीज को भर्ती करने से मना कर दिया और परिजनों के साथ दुर्व्यवहार किया। हंगामे की सूचना पर पहुंची पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मरीज का इलाज शुरू हुआ।
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परिजनों ने मामले की शिकायत स्वास्थ्य मंत्रालय में कर दी है। बताया जा रहा है कि दोपहर में भी इसी तरह एक अन्य मरीज को भर्ती नहीं करने का मामला सामने आया था। जानकारी के अनुसार, नंदानगर निवासी 14 वर्षीय दिवाकर तिवारी शुक्रवार शाम सड़क हादसे में घायल हो गया था।

उसके साथ आए कृष्णा ने बताया कि रात करीब आठ बजे वे दिवाकर को लेकर एम्स की इमरजेंसी पहुंचे लेकिन जूनियर डॉक्टरों ने इलाज करने से मना कर दिया। आरोप है कि डॉक्टर ने गाली-गलौज की और पर्चा फेंक दिया। इसके बाद उन्होंने डायल 112 पर कॉल किया।

पुलिस के पहुंचने पर मामले को शांत कराया गया और तब इलाज शुरू किया गया। कृष्णा ने इस घटना की लिखित शिकायत कार्यकारी निदेशक, मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्रालय से की है। दूसरा मामला महराजगंज के निचलौल निवासी 65 वर्षीय हुकुम का है।

वह कुछ दिन पहले सड़क हादसे में घायल हुए थे और जिला अस्पताल में भर्ती थे। शुक्रवार दोपहर करीब 1:30 बजे परिजन उन्हें लेकर एम्स की इमरजेंसी पहुंचे। परिजनों के अनुसार, 30 मिनट बाद उन्हें भर्ती तो किया गया लेकिन अगले दिन ओपीडी में दिखाने की बात कहकर छुट्टी दे दी गई।
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आरोप है कि अनुरोध करने पर उन्हें गार्ड की मदद से बाहर निकाल दिया गया। साथ ही जूनियर डॉक्टर ने न तो रेफर लिखा और न ही पर्चा संभालने दिया बल्कि उसे फाड़कर फेंक दिया। बाद में परिजन उन्हें बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले गए।

आरोपों की जांच कराई जाएगी। शिकायत मिली है कि समय से उपचार नहीं मिला। ऐसा क्यों हुआ, यह जांच के बाद स्पष्ट होगा। लापरवाही पाई गई तो कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। मरीजों को समय से और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराना प्रबंधन की प्राथमिकता है: डॉ. आराधना सिंह, चेयरपर्सन, मीडिया सेल, एम्स
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