रजिस्ट्रार ने बताया कि आंदोलन के दौरान छात्रों ने अनुशासनहीनता की हदें पार कर दी हैं। सुरक्षाकर्मियों और कर्मचारियों को गाली दी है। उनके साथ अभद्रता की है। शिक्षकों और कर्मचारियों के आवास परिसर में प्रदर्शन किया है। छात्राओं के नर्सिंग हॉस्टल पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को मारपीट कर भगा दिया। इसमें एमबीबीएस के छात्र शामिल रहे। उन्होंने नर्सिंग हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं को बाहर निकालने के लिए मजबूर किया।
10 अप्रैल को रिपोर्ट सौंपेगी कमेटी
रजिस्ट्रार ने बताया कि छात्रों की गतिविधियों की जानकारी के लिए जांच कमेटी बनाई गई है। कमेटी मामले की रिपोर्ट दस अप्रैल को सौंपेगी। घटनाओं के वीडियो और सीसीटीवी फुटेज भी एम्स प्रशासन के पास हैं। इस संबंध में एक हाई पाॅवर कमेटी ने शुक्रवार को बैठक भी की है। इसमें कार्यकारी निदेशक डॉ. सुरेखा किशोर, अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज सौरभ, सभी विभागाध्यक्ष, कॉलेज ऑफ नर्सिंग की प्राचार्य, वार्डन, यूजी व नर्सिंग हॉस्टल के प्रभारी व सिक्योरिटी इंचार्ज मौजूद रहे। सभी कमेटियां 10 अप्रैल तक अपनी रिपोर्ट देंगी। इसके बाद मामले में कार्रवाई की जाएगी।
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एम्स के हॉस्टल में रहने वाले एमबीबीएस छात्र बृहस्पतिवार को आधी रात तक प्रदर्शन किए। उनकी मांग थी कि हॉस्टल का गेट देर रात तक खुला रहना चाहिए। एम्स प्रशासन ने काफी देर तक छात्रों को मानने की कोशिश की, लेकिन छात्र नहीं माने। एसओ कैंट और प्रशासन की टीम पहुंची, तब छात्र माने।
छात्रों की मांगें
- लाइब्रेरी का टाइम बढ़ाया जाए, छात्र डबल शेयरिंग या ट्रिपल शेयरिंग में रहते हैं। फिलहाल लाइब्रेरी टाइम आठ बजे तक है।
- मेस में चार टाइम के भोजन का पैसा लिया जा रहा है। जबकि तीन टाइम खाना खिलाया जा रहा है। मेस में कूपन सिस्टम किया जाए, यानी जितना खाएंगे उतना पैसा देंगे।
- हॉस्टल में पांच मिनट की देरी पर प्रवेश करने पर 5000 की फाइन लगाई जा रही है, इसे खत्म किया जाए।
- ओपीडी और आईपीडी में छात्रों का इलाज मुफ्त में किया जाए। स्टूडेंट वेलफेयर कमेटी को बदला जाए।