गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के चिकित्सकों ने एक जटिल कूल्हे के फ्रैक्चर का सफल ऑपरेशन कर चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है। युवक की पेट के बल लिटाकर एसिटाबुलम तकनीक से सर्जरी की गई। ऑपरेशन के मात्र 24 घंटे के भीतर युवक खड़ा हो गया और चलने भी लगा।
बिहार के सिवान निवासी युवक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गया था। दुर्घटना में उसके कूल्हे की हड्डी (एसिटाबुलम) फ्रैक्चर हो गई। परिजन पहले उसे सिवान के कई अस्पतालों में ले गए लेकिन कहीं भी सर्जरी नहीं हो सकी। इसके बाद गोरखपुर के एक निजी अस्पताल में भी चिकित्सकों ने ऑपरेशन करने से इन्कार कर दिया।
शुक्रवार को परिजन उसे एम्स लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने उसकी स्थिति का आकलन कर छह घंटे के भीतर ऑपरेशन का निर्णय लिया। ऑपरेशन के दौरान मरीज को पेट के बल लिटाकर बगल की ओर से चीरा लगाया गया। चिकित्सकों ने फ्रैक्चर वाली हड्डी को दो प्लेट और 12 स्क्रू की सहायता से जोड़कर स्थिर किया।
सर्जरी करने वाली टीम में डॉ. अरुण पांडेय, डॉ. सुहास मल्ल और डॉ. अरविंद कुमार शामिल रहे। चिकित्सकों ने बताया कि कूल्हे के इस प्रकार के फ्रैक्चर में शुरुआती पांच दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर सर्जरी नहीं होने पर मरीज को स्थायी विकलांगता या कूल्हे की कार्यक्षमता खोने का खतरा रहता है। उन्होंने बताया कि पेट के बल लिटाकर इस प्रकार की सर्जरी तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होती है लेकिन समय पर उपचार मिलने से मरीज तेजी से स्वस्थ हो रहा है।