गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), गोरखपुर के डॉक्टरों ने लैप्रोस्कोपिक तकनीक से जटिल पाइलोप्लास्टी सर्जरी कर एक नई उपलब्धि हासिल की है। 46 वर्षीय महिला जो पीयूजे ऑब्स्ट्रक्शन (मूत्र प्रवाह में आंशिक या पूर्ण रुकावट) से पीड़ित थी, उसका सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया गया।
जांच में पाया गया कि महिला की दाहिनी किडनी सामान्य से अधिक फैल चुकी थी और उसकी कार्यक्षमता लगभग 20 प्रतिशत रह गई थी। जनरल सर्जरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. धर्मेंद्र कुमार पिपल ने ओपीडी में मरीज की जांच के बाद सर्जरी का निर्णय लिया। ऑपरेशन के दौरान पता चला कि किडनी के निचले हिस्से को रक्त पहुंचाने वाली एक असामान्य (एबरेंट) रक्त वाहिका पीयूजे के ऊपर से गुजर रही थी, जिससे उस स्थान पर दबाव बन रहा था और मूत्र प्रवाह बाधित हो रहा था।
इस महत्वपूर्ण रक्त वाहिका को सुरक्षित रखते हुए डॉक्टरों ने पीयूजे को सावधानीपूर्वक काटकर उसे नई स्थिति में जोड़ दिया, जिससे मूत्र का प्रवाह सामान्य हो सका। यह पूरी सर्जरी लैप्रोस्कोपिक तकनीक से की गई, जिसमें छोटे-छोटे छिद्रों के माध्यम से ऑपरेशन किया जाता है। पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में इस तकनीक में कम दर्द, संक्रमण का कम खतरा और तेजी से रिकवरी संभव होती है।
एम्स की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने बताया कि संस्थान आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के जरिए मरीजों को बेहतर और सुरक्षित उपचार देने के लिए प्रतिबद्ध है। इस सर्जरी को डॉ. धर्मेंद्र कुमार पिपल के नेतृत्व में सीनियर रेजिडेंट डॉ. सलमान खान और डॉ. एलन फिलिप की टीम ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया।