प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य के विकास में पूर्ण और एकीकृत प्रयास किए हैं। सफल होने के लिए निवेश ही प्रारंभिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान बजट में कृषि गतिविधियों के लिए अधिक आशाजनक योजनाएं हैं।
कृषि मंत्री शनिवार को राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं वेबिनार के सामाजिक क्षेत्र में नौवें तकनीकी सत्र की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कृषि क्षेत्र को प्रदान की जाने वाली विभिन्न सुविधाओं पर भी चर्चा की। पीआरडीएफ डॉ. आरसी चौधरी ने ‘पूर्वांचल में स्वास्थ्य, धन और रोजगार के लिए जैव उर्वरक फसलों को बढ़ावा’ विषय पर चर्चा की।
उन्होंने कहा कि दुनिया की 60 प्रतिशत आबादी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आयरन और विटामिन ए की कमी से पीड़ित है। उन्होंने गरिष्ठ भोजन को बढ़ावा देने और पोषक तत्वों की खुराक के उपयोग का सुझाव दिया। उन्होंने विटामिन ए के स्रोत के रूप में गोल्डन स्वीट पोटैटो की खेती का सुझाव दिया।
समाजशास्त्र विभाग की अध्यक्ष प्रो. संगीता पांडेय ने महिला किसानों के सशक्तीकरण पर कहा कि यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा शक्तिहीन अपने जीवन की परिस्थितियों पर अधिक नियंत्रण प्राप्त करता है। उन्होंने महिला किसानों के उत्थान में गोरखपुर पर्यावरण राष्ट्रीय समूह के योगदान का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि जब महिला किसानों की बात आती है तो लोगों की धारणा संकीर्ण हो जाती है। इसे बदलना होगा। फाउंडेशन फॉर सोशल वेलफेयर के संस्थापक लेफ्टिनेंट कर्नल कृष्ण मुरारीलाल ने कहा कि खेती को छोड़कर हर परिवार को एक और व्यवसाय करना चाहिए।
सत्र में डॉ. दीपेंद्र शर्मा, डॉ. आरती विश्वकर्मा, डॉ. संजय कुमार राम, डॉ. पवन कुमार, डॉ. संजीव विश्वकर्मा, डॉ. निखिल कुमार, शिवानी मिश्रा, मंतोष यादव, सुनील प्रजापति, गोविंद कुमार भारती आदि उपस्थित रहे।