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Gorakhpur News: छह बैंकों से 1.40 करोड़ लोन लेकर दूसरे खातों में करा दिया था ट्रांसफर

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गोरखपुर। पशु चिकित्सक डॉ. परमात्मा सिंह की आत्महत्या के बाद उनकी उस शिकायत की चर्चा फिर सामने आई है, जिसमें उन्होंने 1.40 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। शिकायत के मुताबिक, गरिमा सिंह ने होम लोन बंद कराने का झांसा देकर उनके नाम से छह बैंकों से लोन कराया। इसके बाद ओटीपी हासिल कर रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा दिया।
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आरोप है कि इसमें बैंककर्मियों की मिलीभगत रही। डॉ. परमात्मा ने गरिमा सिंह, विशाल यादव समेत अन्य लोगों पर धोखाधड़ी की शिकायत पर आरोपियों पर पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था।
शिकायत के अनुसार, फरवरी 2026 में सहकर्मी डॉ. दिलीप कुमार सिंह की रिश्तेदार गरिमा और उसके शिक्षक पति भानू प्रताप सिंह ने परमात्मा से संपर्क किया था। उसने खुद को फाइनेंस कंपनी से जुड़ा बताते हुए कहा था कि एक योजना के तहत उनका चल रहा होम लोन बंद कराया जा सकता है। इसके लिए नया पर्सनल लोन लेने और उसकी रकम उसे देने की बात कही गई। आरोपी गरिमा ने आश्वासन दिया था कि नए लोन की ईएमआई वह खुद चुकाएगी।
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छह बैंकों से एक के बाद एक मंजूर हुआ लोन
डॉ. परमात्मा ने शिकायत में बताया था कि गरिमा ने उनके नाम से छह बैंकों में लोन के आवेदन कर दिया। उन्होंने आपत्ति की तो बताया कि कई बैंकों में आवेदन इसलिए किए गए हैं कि किसी एक से लोन स्वीकृत हो जाए। लेकिन जब अलग-अलग बैंकों से रकम आ गई तो इसे बैंक की गलती बताते हुए पूरी राशि गरिमा को देने के लिए कहा गया। शिकायत के मुताबिक, गरिमा और विशाल यादव ने डॉ. परमात्मा के नाम से ई-मेल आईडी बनाई और ओटीपी हासिल कर उनके बैंक खातों से रकम अलग-अलग खातों में भिजवा दिया। इनमें गरिमा का एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक खाता, मोहन सिंह का खाता और साधना मल्ल और श्रुति सिंह के खाते शामिल बताए गए हैं। रकम फरवरी और मार्च में अलग-अलग तारीखों में ट्रांसफर की गई।

बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत की भी जताई थी आशंका
डॉ. परमात्मा ने शिकायत में कहा था कि एक साथ छह बैंकों से इतनी बड़ी रकम का लोन स्वीकृत होना बैंक अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। उन्होंने संबंधित बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग की थी। शिकायत में यह भी बताया था कि गरिमा ने शुरुआत के दो महीने की ईएमआई चुकाई, इसके बाद किस्तें उनके खाते से कटने लगीं। शिकायत में डॉ. परमात्मा ने खुद और परिवार को किसी तरह का नुकसान होने पर गरिमा, उसके साथियों और कथित तौर पर संलिप्त बैंककर्मियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कार्रवाई की मांग की थी।


इन बैंकों से लिए गए थे लोन
शिकायत में दर्ज विवरण के मुताबिक, 17 फरवरी को बंधन बैंक से 24,50,139 रुपये, 18 फरवरी को फाइनेंस कंपनी चोलामंडलम से 19,32,202 रुपये, एसबीआई से 31,75,000 रुपये, एचडीएफसी से 29,92,130 रुपये, 21 फरवरी को फाइनेंस कंपनी एसएफएमजी से 24,88,201 रुपये और 9,62,968 रुपये के लोन का उल्लेख है। इन रकम को मिलाकर कुल राशि करीब 1.40 करोड़ रुपये बैठती है।

आरोपियों पर गैंगस्टर की तैयारी कर रही पुलिस
1.40 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में पुलिस आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की तैयारी में है। एसएसपी डॉ. कौस्तुभ के मुताबिक, गरिमा सिंह और उसके गिरोह के सदस्यों के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस आरोपियों की आर्थिक गतिविधियों की भी जांच कर रही है। उनके बैंक खातों को फ्रीज कराने के साथ ठगी से अर्जित या अपराध से जुड़ी संपत्तियों के जब्तीकरण की कार्रवाई भी की जाएगी। पुलिस का फोकस गिरोह के नेटवर्क, लेनदेन और संपत्तियों का पता लगाने पर है, ताकि आरोपियों पर कानूनी कार्रवाई के साथ उनकी अवैध कमाई पर भी शिकंजा कसा जा सके।

डॉक्टर परमात्मा के शरीर में कई जगह मिलीं टूटी हड्डियां
डॉ. परमात्मा का देर शाम पोस्टमार्टम कराया गया। रिपोर्ट में शरीर में गंभीर चोटों के साथ कई हड्डियां टूटी मिलीं। रिपोर्ट के अनुसार, गर्दन की हड्डियां टूटने के साथ गले से नीचे शरीर की कई हड्डियां फ्रैक्चर थीं। पसलियां भी कई जगह से टूटी मिलीं। पसलियों के टूटे हिस्से हृदय और फेफड़ों में घुस गए थे। दोनों पैरों की हड्डियां तीन-तीन जगह से टूटी मिलीं। इसके अलावा रीढ़ और हाथ की हड्डियों में भी फ्रैक्चर पाया गया। पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टरों को आंख, नाक, कान और मुंह से खून निकलने के निशान मिले। गंभीर चोटों के कारण शरीर के कई अंदरूनी हिस्से प्रभावित हुए थे। पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी होने के बाद परिजन शव लेकर गृह जनपद मऊ रवाना हो गए। जहां शुक्रवार को उनका दाह संस्कार किया जाएगा।
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