मां और बड़ी बहन की बीमारी में सहारा बनी थी मासूम
जिस मासूम की जिंदगी किताबों और खेल के मैदान में बीतनी चाहिए थी वह छोटी-सी उम्र में ही अपने परिवार की जिम्मेदारियों का सहारा बन चुकी थी। पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाली बच्ची पांच बहनों में दूसरे नंबर पर थी। मां नौ माह की गर्भवती होने के साथ लंबे समय से अस्वस्थ थीं। ऐसे में घर के छोटे-छोटे कामों से लेकर बहनों की देखभाल तक की जिम्मेदारी वह बड़ी बहन के साथ मिलकर निभाती थी।
परिवार पर मुश्किलों का पहाड़ तब और टूट पड़ा, जब 27 जुलाई की शाम बड़ी बहन की अचानक तबीयत बिगड़ गई। सीने में तेज दर्द और बुखार आने पर पिता उसे अस्पताल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों ने उसे भर्ती कर लिया। अस्पताल में दादी उसके साथ रहीं जबकि घर पर गर्भवती मां और छोटी बहनों की जिम्मेदारी इसी मासूम के कंधों पर आ गई। अगले दिन उसने बिना किसी कहे रसोई संभाली, अपने हाथों से खाना बनाया और छोटी बहन को साथ लेकर अस्पताल पहुंची। बड़ी बहन को खाना खिलाने के बाद उसने तीसरी बहन को अस्पताल में रुकने के लिए कहा और खुद घर के लिए निकल पड़ी।
मासूम की पोस्टमार्टम रिपोर्ट खोल रही भयावह वारदात की परतें
गोरखपुर। रोहिन नदी से मिले मासूम के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने उस भयावह वारदात की परतें खोल दी हैं, जिसने हर किसी को झकझोर दिया है। मेडिकल जांच में सामने आया कि बच्ची की मौत एंटीमॉर्टम इंजरी (मौत से पहले लगी चोटों) के कारण हुई। गले की हड्डी टूटने और गला दबाने से दम घुटने को मौत का कारण बताया गया हैं। दो डॉक्टरों के पैनल ने वीडियोग्राफी के साथ मासूम का पोस्टमार्टम किया।
सूत्रों के मुताबिक, मासूम की हालत देखकर पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों की आंखें भी नम हो गईं। हालांकि चिकित्सकों ने पूरी संवेदनशीलता के साथ मेडिकल प्रक्रिया पूरी की और हर चोट व साक्ष्य को बारीकी से दर्ज किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, बच्ची के गले, दोनों पैर, पेट पर गंभीर चोट मिली हैं। गले की हड्डी टूट गई थी। शरीर की चार हड्डी टूटी मिली। चेहरा और प्राइवेट पार्ट विकृत हो गया था। पूरे शरीर पर खरोंच के निशान मिले हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि गर्दन पर काफी दबाव डाला गया था। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि आरोपी ने दर्द से चीख रही मासूम की गर्दन पैर से दबा दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।