अस्पताल प्रबंधन ने रजिस्ट्रेशन से लेकर पैम्फलेट छपवाने में भी जबरदस्त गोलमाल किया है। अस्पताल के नाम पर जो पैम्फलेट छपवाया है, उस पर तीन नंबर दर्ज किए गए हैं। एक नंबर स्विच ऑफ जा रहा है। जबकि, दूसरा नंबर प्रिंस गुप्ता के नाम पर है। संपर्क करने पर प्रिंस ने मौत की बात स्वीकार की, लेकिन बोला वह निदेशक नहीं है। निदेशक कोई डॉ. एपी जायसवाल हैं।
डॉ. एपी जायसवाल के नंबर पर संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि वह अस्पताल के निदेशक नहीं है। ऑनकाल अस्पताल में इलाज के लिए जाते हैं। निदेशक कोई बिहार का रहने वाला है। लेकिन, उसका नाम नहीं पता है। उन्होंने कहा कि वे मरीज का उपचार नहीं कर रहे थे। उसे न्यूरो के डॉक्टर देख रहे थे। वहीं, तीसरे नंबर पर संपर्क करने पर बैजनाथ साहनी ने फोन उठाया और उसने खुद को मैनेजर बताया।
कहा कि मरीज की हालत चार दिन पहले स्थिर हो गई थी। उस समय से ही डॉक्टर परिजनों को लगातार मरीज को केजीएमयू ले जाने की सलाह दे रहे थे। शुक्रवार को मरीज को हायर सेंटर रेफर किया गया। परिजन पांच घंटे तक एंबुलेंस में मरीज को घुमाते रहे। इस दौरान वह कई अस्पताल गए। पांच घंटे बाद आकर मौत का आरोप लगाने लगे।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की सूची में न तो अस्पताल का नाम दर्ज है और न ही डॉ एपी जायसवाल के नाम से कोई डॉक्टर। इतना ही नहीं ऑनकाल जाने वाले डॉक्टर को यह भी नहीं पता है कि अस्पताल का मालिक कौन है।
मामले की होगी जांच
कैंट इंस्पेक्टर शशिभूषण राय ने बताया कि युवक की मौत हुई है। मामले में परिजनों को शांत कराते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजवाया गया है। मृतक के साले ने तहरीर दी है। तहरीर के आधार पर जांच की जा रही है। जांच के बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी।