गोरखपुर। भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री एवं प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने गोरखपुर प्रवास के दौरान संगठन की जमीनी स्थिति और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों का फीडबैक लिया। उन्होंने छोटे-बड़े नेताओं, जनप्रतिनिधियों और सहयोगी दल के नेताओं से बातचीत कर उनकी बात सुनी। संगठन में समन्वय और कार्यकर्ताओं के बीच संवाद बढ़ाने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि सहयोगियों को विश्वास में लेकर ही आगे की रणनीति तय की जाएगी।
बैठकों में 62 विधानसभा क्षेत्रों के बूथवार प्रदर्शन की समीक्षा की गई। तावड़े ने बूथों को समय रहते मजबूत करने और बड़े नेताओं व जनप्रतिनिधियों को भी बूथ स्तर तक पहुंचने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं के बीच विधायकों की सक्रियता का फीडबैक भी लिया और विधायकों को नियमित रूप से जनता के बीच जाने की सलाह दी। बूथ स्तर से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर आगे की गतिविधियां तय करने पर भी जोर दिया।
62 विधानसभा क्षेत्रों का रिकॉर्ड था तावड़े के पास
प्रदेश प्रभारी के पास गोरखपुर क्षेत्र की सभी 62 विधानसभा सीटों का आंकड़ा था। बैठक में जब कोई जनप्रतिनिधि या संगठन का पदाधिकारी किसी मुद्दे को उठाता तो वह उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर जवाब देते थे। कुशीनगर के प्रदर्शन को लेकर एक पदाधिकारी ने लोकसभा चुनाव में कम अंतर से सीट गंवाने के पीछे सपा प्रत्याशी के बिरादरीगत वोटों को वजह बताया। साथ ही सहयोगी दल को दी गई दो सीटों का भी जिक्र किया। इस पर तावड़े ने विधानसभा और लोकसभा चुनाव के आंकड़े सामने रखते हुए कहा कि कुशीनगर में विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत का अंतर करीब 33 हजार था जो लोकसभा चुनाव में घटकर 13 हजार रह गया। उन्होंने कहा कि सपा प्रत्याशी की बिरादरी का वोट वहां बहुत कम था। कमियों की जिम्मेदारी दूसरों पर डालने के बजाय आत्ममंथन की जरूरत है।
50 प्रतिशत विधायकों के टिकट काटने का सुझाव
पूर्व जिलाध्यक्षों और पूर्व विधायकों की बैठक में देवरिया के पूर्व जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने सुझाव दिया कि यदि पार्टी मौजूदा विधायकों में से 50 प्रतिशत के टिकट काटती है तो 2027 में 2017 जैसी वापसी हो सकती है। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में पार्टी जहां पीछे रही, उस अंतर को संगठनात्मक स्तर पर पूरा किया जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि जनता का योगी और मोदी पर भरोसा कायम है तथा बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति में सुधार हुआ है।
पूर्व सांसद ने यूजीसी का मुद्दा उठाया
पूर्व राज्यसभा सांसद जयप्रकाश निषाद ने यूजीसी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से लाई गई व्यवस्था को लेकर अलग-अलग वर्गों की अलग राय है। सवर्ण वर्ग इसे हटाने, जबकि पिछड़ा और अनुसूचित वर्ग इसे लागू करने की मांग कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे किसी भी समुदाय को परेशानी न हो और किसी वर्ग को नुकसान न पहुंचे।