लोगों ने क्या कहा...
हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. चितरंजन मिश्र ने कहा कि सत्याग्रह को निलंबित करने वाली सत्ता अपने मूल आचरण में मिथ्याग्रही होती है। प्रो कमलेश गुप्त के साथ 20 वर्ष तक अध्यापन किया है। उन पर लगे आरोपों को सच नहीं कहा जा सकता है। अगर शिक्षक और छात्र अपनी पर आ गए तो कुलपति को विश्वविद्यालय छोड़कर भागना पड़ेगा।
हिंदी विभाग के निलंबित आचार्य प्रो. कमलेश कुमार गुप्त ने कहा कि जब विकट परिस्थितियां आती हैं, किसी न किसी को बोलना पड़ता है। समर्थन में आए सभी लोगों के प्रति आभार प्रकट करता हूं। शांतिपूर्वक सत्याग्रह चलता रहेगा।
प्रो. अजेय कुमार गुप्ता ने कहा कि नोटिस के बारे में अखबार पढ़कर पता चला है। नोटिस अगर जारी हुआ है तो पहले मुझे मिलना चाहिए था। अभी तक मुझे नोटिस नहीं मिला है। जब मिलेगा तो उसका जवाब दिया जाएगा।
प्रो. चंद्रभूषण अंकुर ने कहा कि कार्यपरिषद में अनुमोदन की प्रत्याशा में निलंबन किया गया है। कार्यपरिषद में इसे लाना ही पड़ेगा। उस समय इस मुद्दे को उठाया जाएगा। अभी हम प्रो. कमलेश गुप्त के सत्याग्रह को पूरा समर्थन करते हैं।
महाविद्यालयों पर प्रदर्शन करेंगे शिक्षक
गोरखपुर विश्वविद्यालय संबद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (गुआक्टा) ने विभिन्न मांगों को लेकर 24 दिसंबर को विश्वविद्यालय पर होने वाले प्रदर्शन का अब महाविद्यालयों पर ही करने निर्णय लिया है। अध्यक्ष डॉ केडी तिवारी एवं महामंत्री डॉ धीरेंद्र सिंह ने कहा कि गुआक्टा हिंदी विभाग के आचार्य के निलंबन के कार्यवाही की निंदा करती है और निलंबन की कार्यवाही को रद्द करने की मांग करती है।