मिलावटी पनीर की सप्लाई भोर में हो रही है। दूधिए, कंटेनर में मिलावटी पनीर पहुंचा रहे हैं। महदेवा में पनीर बनाने के चार बड़े कारखाने हैं। यहां सोमवार को मिलावटी पनीर तैयार किया जा रहा था। एक कारखाने में पनीर बना रहे कर्मचारी ने बताया कि जितना पनीर चाहिए, आपको मिल जाएगा। गोरखपुर शहर के अलावा सहजनवां, खलीलाबाद के मार्केट में पनीर भेजा जाता है।
सहालग के करीब आते ही मिलावटी पनीर के धंधेबाज भी सक्रिय हो गए हैं। धंधेबाजों का नेटवर्क इतना तगड़ा है कि आपको कितना भी पनीर चाहिए, चार से छह घंटे में उपलब्ध हो जाएगा। शहर के अलावा खजनी और महदेवा बाजार में 20 से ज्यादा जगहों पर नकली पनीर तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा आजमगढ़ से भी बड़े पैमाने पर मिलावटी पनीर आने लगा है।
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सूत्रों के मुताबिक, यहां से सहजनवां और खलीलाबाद में भी पनीर खपाया जा रहा है। बाजार में इस सहालग में एक महीने के दौरान करीब 2000 क्विंटल पनीर की खपत का अनुमान है। डॉक्टरों की सलाह है कि मिलावटी पनीर खाने से बचें वरना पाचन तंत्र खराब हो सकता है।
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खजनी क्षेत्र के महदेवा, भैंसा, बढ़नी व भीउरी में पनीर बनाने के कारखानों की भरमार है। धंधेबाज मिल्क पाउडर में खराब रिफाइंड मिलाकर पनीर बनाते हैं। यह फुटकर बाजार में आसानी से लगभग 300 रुपये किलो मिल सकता है। असली पनीर की लागत ही 300 से 320 रुपये किलो है।
शुद्ध पनीर के कारोबारी अंगद यादव बताते हैं- एक किलो दूध में 200 ग्राम पनीर निकलता है। इस हिसाब से एक किलो पनीर के लिए पांच लीटर दूध चाहिए। एक किलो शुद्ध दूध 60 रुपये से कम में नहीं मिलेगा। ऐसे में 300 रुपये तो लागत ही आती है जबकि मिलावटी पनीर बाजार में 250 से 300 रुपये किलो मिल जाएगा।
कंटेनर में बर्फ के बीच पनीर रख पहुंचाते हैं दूधिए
मिलावटी पनीर की सप्लाई भोर में हो रही है। दूधिए, कंटेनर में मिलावटी पनीर पहुंचा रहे हैं। महदेवा में पनीर बनाने के चार बड़े कारखाने हैं। यहां सोमवार को मिलावटी पनीर तैयार किया जा रहा था। एक कारखाने में पनीर बना रहे कर्मचारी ने बताया कि जितना पनीर चाहिए, आपको मिल जाएगा।
गोरखपुर शहर के अलावा सहजनवां, खलीलाबाद के मार्केट में पनीर भेजा जाता है। सहालग के साथ ही होटल-रेस्टोरेंट में खपत होती है। इसके अलावा धंधेबाज शहर के निजामपुर, बिछिया व पादरी बाजार में भी बड़ी मात्रा में मिलावटी पनीर बना रहे हैं।
कानपुर व मथुरा से आ रहा मिलावटी खोआ
सहालग में सिर्फ पनीर ही नहीं, मिठाई व अन्य खाने की सामग्री बनाने के लिए खोआ की भी खपत ज्यादा होगी। मिलावटी खोआ खपाने वाले धंधेबाज ने तैयारी शुरू कर दी है। कानपुर और मथुरा से भारी मात्रा में मिलावटी खोआ मंगाया जा रहा है। मंंडी में खोआ लगभग 270 रुपये से लेकर 450 रुपये किलो तक बिक रहा है। सहालग शुरू होते ही इसके दाम में और इजाफा होने की उम्मीद है।
पेट से संबंधित हो सकती हैं बीमारियां
जिला अस्पताल के डॉक्टर बीके सुमन का कहना है कि मिलावटी पनीर बनाने में मिल्क पाउडर के साथ घटिया गुणवत्ता का रिफाइंड ऑयल और अन्य रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। यह स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। ऐसे पनीर के सेवन से पेट संबंधी बीमारियां, फूड पॉइजनिंग और अन्य गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
खाद्य सुरक्षा विभाग पूरी तरह सतर्क है। संदिग्ध स्थानों पर नियमित जांच की जा रही है। साथ ही उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे प्रमाणित दुकानों से ही पनीर और खोआ खरीदें और किसी भी संदिग्ध खाद्य पदार्थ की सूचना तुरंत विभाग को दें ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके: डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा
शादी में अब पनीर की जगा मशरूम व कटहल की बढ़ी मांग
सहालग खाने के मेन्यू में पनीर की जगह लोग मशरूम व कटहल को प्राथमिकता दे रहे हैं। व्यापारी विकास कुमार गुप्ता के अनुसार, मशरूम की खपत इस एक महीने के सहालग में लगभग 1100 क्विंटल तक हो सकती है। विगत तीन वर्ष पहले इसकी खपत लगभग पांच से छह क्विंटल ही थी।
उनका कहना था कि मशरूम में मिलावट न होने के कारण सेहत के लिए लोग इसे पसंद कर रहे हैं। वहीं महेवा मंडी के व्यापारी रमजान मेकरानी कहते हैं कि शादी के सीजन में कटहल की खपत अब ज्यादा बढ़ने लगी है। फुटकर बाजार में कटहल इस समय 60 रुपये बिक रहा है। मंडी में प्रतिदिन 50 कुंतल से ज्यादा कटहल की आवक हो रही है।