उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में छह साल के अंदर एक ही परिवार के चार लोगों की कुपोषण के कारण हुई मौत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। इसके बाद हरकत में आए ज्वाइंट मजिस्ट्रेट व सीएमओ के साथ प्रशासनिक अमले की टीम ओझागंज पहुंचकर जांच पड़ताल में जुट गई।
ये है पूरा मामला
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के ओझागंज गांव का है। यहां छह साल के अंदर एक ही परिवार के चार लोगों की मौत कुपोषण के कारण हो गई थी। इस मामले को लेकर आयोग ने अपने मुख्य सचिव के माध्यम से यूपी सरकार को एक नोटिस जारी किया, जिसमें जिले में सामाजिक कल्याण योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन से संबंधित डेटा सहित एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
इसके बाद जिले के अधिकारियों में हड़कंप मच गया, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, सीएमओ जेपी त्रिपाठी, खंड विकास अधिकारी कप्तानगंज उमाशंकर सिंह, सीडीपीओ मिथिलेश बौद्ध, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ विनोद कुमार व अन्य अधिकारी पहुंचे। हरिश्चंद्र व उनकी बीमार बेटी घर पर नहीं मिले। अधिकारियों ने पड़ोसियों से उनके बारे में जानकारी हासिल कर जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दिया है।
डीएम आशुतोष निरंजन ने कहा कि मामले की जांच के लिए एक टीम गठित कर दी गई। इससे पहले मई और दिसंबर 2019 में एक टीम जांच करने पीड़ित के घर गई थी। उस दौरान उन्हें जिला अस्पताल के नूट्रिशनिस्ट सेंटर रेफर किया गया था, उस समय इन्होंने अपने बच्चे को नूट्रिशनिस्ट सेंटर ले जाने से मना कर दिया था। इनकी आर्थिक स्थिति की भी जांच की गई, इनके पास पक्का मकान, पक्का शौचालय है। इनके पास गैस कनेक्शन, बिजली का कनेक्शन भी है।
डीएम ने बताया कि जांच में ये भी पाया गया कि राशन कार्ड पर नियमित उठान हो रहा था। हरीश चंद्र का वजन इस समय 75 किलो है। जांच रिपोर्ट के आधार पर ये मामला कुपोषण अथवा सरकारी योजनाओं के अभाव में नहीं लगता है।