गोरखपुर जोन में अनसुलझे बड़े मामलों के पर्दाफाश के लिए विशेष टीम गठित कर दी गई है। इसकी मानीटरिंग एडिशनल एसपी रैंक के अफसर करेंगे। ये अफसर गैर जनपद के होंगे। मसलन, बस्ती के मामले की विवेचना गोरखपुर के अफसर के हवाले होगी। इसके पीछे उद्देश्य यह है कि पुलिस किसी स्थानीय दबाव, प्रभाव में न आए। एडिशनल एसपी हर सप्ताह केस की प्रगति रिपोर्ट एडीजी जोन को देंगे।
जानकारी के मुताबिक, विशेष टीम में एक इंस्पेक्टर, दो दरोगा और तीन सिपाहियों को शामिल किया गया है। ये सभी एडीजी जोन के अधीन हैं। टीम की मानीटरिंग एडिशनल एसपी को सौंपी गई है।
बस्ती के मामले से सेल की शुरुआत
इस सेल की शुरुआत बस्ती में एक अनसुलझे मामले से कर दी गई है। गोरखपुर में ट्रेनी एसपी की देखरेख में इसकी विवेचना हो रही है। बताया जा रहा है कि इस मामले में डकैती और दुष्कर्म के एक आरोपित ने पत्नी की मदद से बिहार की तीन महिला संन्यासियों पर उसकी बेटी का अपहरण कर हत्या का केस दर्ज करा दिया, जबकि लड़की खुद कोर्ट पहुंचकर यह बता चुकी है कि वह जिंदा है।
बस्ती पुलिस पर आरोप है कि उसने किसी के प्रभाव में आकर केस दर्ज किया। दो थानों में विवेचना स्थानांतरित होने के बाद भी मामला नहीं सुलझ पाया है। बाद में इस मामले में आरोपित बिहार की तीन महिला संन्यासियों ने एडीजी जोन दावा शेरपा से मिलकर न्याय की गुहार लगाई। उन्होंने एडीजी को बताया था कि बिहार में कुछ लोगों पर उन्होंने डकैती और दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था। इसमें बस्ती निवासी आरोपित भी शामिल था। बदले में बस्ती के आरोपित ने उनके खिलाफ फर्जी केस दर्ज करा दिया।
जोन के कई जिलों में ऐसे बड़े मामले सामने आए हैं, जिनके पर्दाफाश के लिए स्थानीय पुलिस कुछ खास नहीं कर पा रही है। इस वजह से विशेष टीम गठित कर दी गई है। यह टीम एडिशनल एसपी की देखरेख में काम करेगी। बस्ती का पहला मामला टीम को सौंपा गया है।
दावा शेरपा, एडीजी जोन