जोन में वाहन चोरी की बढ़ती घटनाओं पर एडीजी सख्त हो गए हैं। उन्होंने सभी कप्तानों को निर्देश दिया है कि अब किसी भी थानाक्षेत्र में वाहन चोरी की घटनाएं हुईं तो बीट सिपाही जिम्मेदार माने जाएंगे। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही इसमें एसओ की जिम्मेदारी भी तय हो। एडीजी ने चोरी हुए वाहनों की ज्यादा से ज्यादा बरामदगी पर भी ध्यान देने को कहा है। कम बरामदगी होने पर संबंधित थानेदार के खिलाफ कार्रवाई होगी।
जोन के ग्यारह जिलों में वाहन चोरी की बढ़ती हुई घटनाओं को रोकने के लिए एडीजी दावा शेरपा ने सभी पुलिस कप्तानों को पत्र लिखकर निर्देश जारी किया है। उन्होंने बीट पुलिसकर्मियों को निरंतर गश्त करने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिया है कि वाहन चोरी होने पर सबसे पहले बीट सिपाहियों की जिम्मेदारी तय हो।
उन्हें बरामदगी के लिए लगाया जाए। साथ ही थाने स्तर पर मासिक बैठक में देखा जाए कि किस थाने में कितने वाहन चोरी और उसके सापेक्ष कितने बरामद हुए। चोरी की अपेक्षा बरामदगी और गिरोह के खिलाफ कार्रवाई संतोषजनक न हो तो थानेदार की भी जिम्मेदारी तय हो।
एक दिन में चोरी होते हैं करीब तीन वाहन
पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, गोरखपुर जिले में एक दिन में औसतन तीन वाहन चोरी होते हैं। अकेले जनवरी व फरवरी माह में करीब सौ से अधिक वाहन चोरी हुए हैं, जबकि बरामदगी आधे से भी कम है।
पिछले कु छ वर्षों में वाहन चोरी के आंकड़े
जिले में वर्ष 2016 में 903, वर्ष 2017 में 982, वर्ष 2018 में 898 और 15 दिसंबर वर्ष 2019 तक 752 वाहन चोरी हुए हैं। मंडल के देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज जिले के आंकड़े जोड़ दें तो वर्ष 2016 में 1201, वर्ष 2017 में 1358, वर्ष 2018 में 1326 और वर्ष 2019 में 1259 वाहन चोरी की घटनाएं हुई हैं।
जोन की पुलिस को वाहन चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने का निर्देश दिया गया है। साथ ही गैंग के सदस्यों के अधिक गिरफ्तारी कर बरामदगी बढ़ाने को भी कहा गया है। बीट पुलिसकर्मियों और थानेदारों की जिम्मेदारी तय होगी।- दावा शेरपा, एडीजी जोन