इसी मामले को लेकर भाजपा कार्यकर्ता गोरखपुर से नगर विधायक डॉ. आरएमडी अग्रवाल के पास पहुंच गया। अपनी कार्यशैली के अनुसार विधायक ने पहले अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी, फिर डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी को फोन किया लेकिन फोन नहीं उठा। अफसरों की इस कार्यप्रणाली से विधायक ने नाराजगी जताई। साथ ही अपनी बात को अफसरों के साथ ही मुख्यमंत्री व दोनों उपमुख्यमंत्री तक पहुंचाने के लिए ट्विटर का सहारा लिया।
इसी का नतीजा रहा कि यूपी सरकार के आला अफसर बैकफुट पर आए। आनन-फानन में भाजपा कार्यकर्ता के रिश्तेदार की हत्या का मुख्य आरोपित शानू खान लखीमपुर खीरी में गिरफ्तार किया गया। साथ ही लखीमपुरखीरी के कोतवाली प्रभारी अजय कुमार मिश्रा को लाइनहाजिर कर दिया गया। इन कार्रवाइयों की पुष्टि नगर विधायक ने खुद की है। विधायक का कहना है कि अपर मुख्य सचिव व डीजीपी स्तर से ही कार्रवाई की जानकारी दी गई है।
भाजपा कार्यकर्ता महेंद्र प्रताप ने कहा कि छोटे कार्यकर्ता के लिए डॉ. आरएमडी अग्रवाल ने अपनी विधायकी दांव पर लगा दी। बहुत कम नेता होते हैं, जो कार्यकर्ता के मुद्दे पर अपर मुख्य सचिव गृह, डीजीपी से भिड़ जाएं। गर्व होता है ऐसे विधायक पर, जो छोटे कार्यकर्ता की खातिर अपनी सरकार के अफसरों को भी कटघरे में खड़े करने से नहीं हिचके।
हर विधायक का यही दायित्व
भाजपा नगर विधायक डॉ. आरएमडी अग्रवाल ने कहा कि यह हर विधायक का दायित्व है। भले ही वह सत्ता पक्ष का क्यों न हो? अपने नागरिक व कार्यकर्ताओं के लिए हमेशा ईमानदार रहना चाहिए। यदि नहीं रहेगा तो उसके इस कुकृत्य के कारण पार्टी की छवि खराब होगी। पार्टी व मुख्यमंत्री का निर्देश है कि विधायक अपने क्षेत्र में जागरूक रहें और किसी प्रकार का अन्याय व शोषण न होने दें। जो ऐसा नहीं करते हैं, वे पार्टी की छवि खराब करते हैं।