बैंक में फर्जी खाता खोलकर कार लोन की रकम हड़पने के आरोपी शमीम को पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया। इसके सगे भाई वसीम को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। 2019 में मामले में केस दर्ज हुआ था। तीन साल से दोनों फरार चल रहे थे।
पकड़े गए आरोपी की पहचान महराजगंज के पुरंदरपुर निवासी शमीम के रूप में हुई है। कैंट इंस्पेक्टर शशिभूषण राय ने बताया कि वसीम अहमद ने इंजीनियरिंग कॉलेज के पास गिट्टी-बालू का दुकान किया था। उसने 2014 में आंध्रा बैंक से कार के लिए 7.53 लाख रुपये लोन लिया। विराज मोर्ट्स के नाम से डीडी बनी थी।
वसीम व शमीम ने विराज मोर्ट्स के नाम से इलाहाबाद बैंक में खाता खोला और फिर वसीम ने अपने खाते में रुपये भुगतान करा लिया। इसके बाद धीरे-धीरे एक माह के अंदर शमीम अहमद ने खाते से रुपये निकाल लिया। जबकि, बैंक द्वारा कार खरीदने के लिए लोन दिया गया था।
इंस्पेक्टर ने बताया कि शमीम अहमद ने बैंक खाता खोलने में जो आईडी प्रूफ, डीएल, निवास प्रमाणपत्र, पेन कार्ड का इस्तेमाल किया था, सब फर्जी थे।
उन्होंने बताया कि वसीम व शमीम सगे भाई हैं और आईडी प्रूफ में जन्मतिथि में सिर्फ एक महीने का ही अंतर है। आरोपी वसीम को पहले ही जेल भेजा जा चुका है। अब शमीम की गिरफ्तारी की गई है।
जालसाजी के आरोपी को जेल भेजा
आवास दिलाने के नाम पर महिलाओं से जालसाजी करने वाले को पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। उसकी पहचान बांसगांव निवासी प्रतीक मद्धेशिया के रूप में हुई।
जानकारी के मुताबिक, हरपुर बुदहट थाने के करनपुरा गांव की महिलाओं से आवास दिलाने के नाम पर तीन-तीन हजार रुपये वसूले गए थे। आवास नहीं मिलने पर महिलाओं ने संपर्क किया तो वह भागने लगा। पीड़ित महिलाओं की तहरीर पर केस दर्ज कर पुलिस आरोपी की तलाश कर रही थी। मंगलवार को पुलिस ने जेल भिजवा दिया।