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Gorakhpur News: सरकारी योजनाओं का झांसा देकर खाते खुलवाए, तीन पर एफआईआर

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- खोराबार थाने में आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुई प्राथमिकी
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- महिला का खाता खुलवाकर नहीं दिया पासबुक और एटीएम कार्ड

अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर लोगों के बैंक खाते खुलवाकर साइबर ठगी की रकम का लेनदेन का मामला सामने आया है। इस मामले में खोराबार थाना पुलिस ने शक्ति जायसवाल, शिवम पटवा और वंश निषाद के खिलाफ धोखाधड़ी और साइबर फ्रॉड से संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
खोराबार थाना क्षेत्र के मदरहवा गांव निवासी रेनू ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनकी पहचान का युवक शक्ति निवासी झारखंडी, थाना एम्स थी। वह अपने दोस्त शिवम पटवा के साथ उनसे मिला। दोनों ने उसे गरीब कल्याणकारी योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता और सिलाई मशीन दिलाने का आश्वासन दिया। इसी बहाने उन्होंने बैंक में खाता खुलवाने के लिए आधार और पैन कार्ड ले लिया। आरोप है कि दोनों युवकों ने उसके दस्तावेजों के आधार पर इंडियन बैंक में खाता खुलवाया और आधार कार्ड से एक मोबाइल सिम भी निकलवा लिया। खाता खुलने के बाद पासबुक, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड अपने पास ही रख लिया। जब रेनू ने योजनाओं का लाभ मिलने के बारे में पूछा तो आरोपियों ने बताया कि खाते से संबंधित दस्तावेज अपने एक साथी वंश निषाद को दे दिए हैं और जल्द ही योजना का लाभ मिल जाएगा। कुछ समय बाद जब रेनू बैंक पहुंची और खाते की जानकारी ली तो पता चला कि उनके खाते से लाखों रुपये का लेनदेन हुआ है। जबकि उन्होंने न तो खाते में कोई पैसा जमा किया और न ही कोई निकासी की थी। इसके बाद उसे अपने साथ धोखाधड़ी का अहसास हुआ।
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पीड़िता का आरोप है कि आरोपी अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर अनपढ़ और गरीब लोगों को सरकारी योजनाओं का लालच देकर उनके बैंक खाते खुलवाते हैं। इसके बाद उन खातों में साइबर ठगी से प्राप्त रकम मंगवाकर एटीएम, पासबुक और सिम कार्ड की मदद से पैसा निकाल लेते हैं। एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने बताया कि तहरीर के आधार पर शक्ति जायसवाल, शिवम पटवा और वंश निषाद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। जल्द ही इन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।


संगठित गिरोह कर रहा काम
सूत्रों ने बताया कि यह काम संगठित तरीके से होता है। गिरोह में शामिल लोग पहले साइबर ठगी को अंजाम देते हैं। इसके बाद रकम को ट्रांसफर करने के लिए इन खातों की मदद लेते हैं। लोगों को झांसा देकर खाता खुलवाने के लिए लोकल स्तर पर युवाओं को रखा जाता है। इन्हें प्रति खाते पर कमीशन मिलता है। अलग-अलग खातों में रुपये भेजने की वजह से पुलिस भी जल्द ट्रेस नहीं कर पाती। इसके बाद यह रुपये एक जगह इकट्ठा कर देश से बाहर भेज दिए जाते हैं। बताया जा रहा है कि बाद में इसे क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया जाता है। पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े लोगों की तलाश कर रही है।
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झांसे में आकर न दें दस्तावेज
एसपी क्राइम सुधीर जायसवाल ने बताया कि साइबर ठगी से बचने के लिए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी व्यक्ति के कहने पर सरकारी योजना या अन्य लाभ के नाम पर अपना आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड या मोबाइल सिम किसी को न दें। बैंक खाता खुलवाने के बाद पासबुक, एटीएम और सिम हमेशा अपने पास रखें। समय-समय पर बैंक जाकर या मोबाइल बैंकिंग के माध्यम से खाते का लेनदेन जरूर जांचें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत बैंक और पुलिस को दें। अनजान लोगों के झांसे में आने से बचें और सरकारी योजनाओं की जानकारी केवल आधिकारिक स्रोतों से ही प्राप्त करें।
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