प्रधानाध्यापिका रीता आर्या का आरोप है कि उन्हें जबरन चार्ज हटाने के लिए साजिश रची जा रही है। उनका कहना है कि रसोइया गुंजा देवी जानबूझकर खराब चावल से भोजन बनाती है और मना करने पर स्टाफ को भड़काती है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रसोइया उन पर ईसाई धर्म अपनाने का दबाव बनाती है और विद्यालय छोड़कर धर्म प्रचार में चली जाती है। प्रधानाध्यापिका के अनुसार, जातिगत षड्यंत्र के तहत उनके खिलाफ मारपीट कर वीडियो बनवाया गया ताकि उन्हें हटाया जा सके।
वहीं, सहायक शिक्षिका श्रद्धा शुक्ला ने प्रधानाध्यापिका पर तानाशाही रवैया अपनाने और स्टाफ को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि आए दिन विद्यालय में विवाद होता रहता है और हाल ही में भी प्रधानाध्यापिका द्वारा मारपीट की गई, जिसका वीडियो वायरल हुआ था। श्रद्धा शुक्ला के अनुसार, भोजन में कीड़े मिलने को लेकर दोनों पक्षों में हाथापाई हुई।
सूत्रों के मुताबिक, विद्यालय में जिम्मेदारियों को लेकर लंबे समय से तनातनी चल रही थी और मिड-डे मील में कीड़े मिलने की घटना ने आग में घी डालने का काम किया।
इस पूरे मामले पर खंड शिक्षा अधिकारी सावन दुबे ने घटना को बेहद निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के मंदिर में इस तरह की घटनाएं शर्मनाक हैं। रसोइया और प्रधानाध्यापिका—दोनों के खिलाफ कार्रवाई के लिए रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है। कई बार समझाने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ, जिससे विद्यालय का माहौल लगातार खराब हो रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह विवाद सुनियोजित तरीके से वीडियो वायरल कर दबाव बनाने का प्रयास था या फिर विभागीय लापरवाही ने हालात को यहां तक पहुंचा दिया? फिलहाल इस टकराव की सबसे बड़ी कीमत विद्यालय के छात्र-छात्राओं को चुकानी पड़ रही है, जिनकी पढ़ाई और अनुशासन इस विवाद की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है।