गोरखपुर। धुरियापार में उद्योगों की स्थापना के साथ ही अपशिष्ट जल के निस्तारण की व्यवस्था भी तैयार होगी। इसके लिए आधा मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाया जाएगा। गीडा प्रशासन के इस प्रस्ताव को शासन से मंजूरी मिल गई है। इससे औद्योगिक क्षेत्र में शुरुआत से ही पर्यावरण संरक्षण के मानकों के अनुरूप सुविधाएं विकसित करने में मदद मिलेगी।
भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य) के तहत धुरियापार में नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। यहां उद्योगों को बसाने से पहले सड़क, बिजली, पानी और अपशिष्ट जल प्रबंधन जैसी जरूरी सुविधाएं तैयार करने की योजना है। गीडा प्रशासन के मुताबिक, यहां स्थापित होने वाली अधिकांश औद्योगिक इकाइयों में जीरो वाटर डिस्चार्ज की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसके तहत उद्योगों से निकलने वाले पानी को उपचारित कर दोबारा इस्तेमाल किया जाएगा ताकि बाहर अपशिष्ट जल छोड़ने की जरूरत न पड़े।
इसी व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए आधा एमएलडी क्षमता के एसटीपी की योजना बनाई गई है। इससे औद्योगिक क्षेत्र में सीवरेज प्रबंधन को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। उद्योगों के संचालन के बाद पानी के निस्तारण को लेकर परेशानी भी कम होगी।