गोरखपुर। भारत स्वाभिमान पतंजलि योगपीठ गोरखपुर के जिला प्रभारी हरि नारायण धर दुबे ने कहा कि योग, अध्यात्म और राष्ट्रवाद का समन्वय ही कुंडलिनी जागरण की वास्तविक अवस्था है। कुंडलिनी जागरण का प्रभाव शरीर की सभी ग्रंथियों और हार्मोंस पर पड़ता है।
वह अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में महायोगी गुरु गोरखनाथ योग संस्थान, गोरखनाथ मंदिर एवं महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की ओर से आयोजित साप्ताहिक योग शिविर एवं संगोष्ठी के पांचवें दिन बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। गोरखनाथ मंदिर स्थित महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में ‘गुरु गोरखनाथ के कुंडलिनी योग पर वैज्ञानिक व्याख्यान’ विषयक संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि योगाभ्यास एवं प्राणायाम के माध्यम से हार्मोंस का संतुलन स्थापित होने पर व्यक्ति में आध्यात्मिक भाव का विकास होता है, जो सार्वभौमिकता की अवस्था है। इसी स्थिति में व्यक्ति स्वार्थ से ऊपर उठकर परमार्थ और विश्व कल्याण की भावना से प्रेरित होता है।
उन्होंने कहा कि मेडिकल साइंस के शरीर क्रिया विज्ञान का उत्कर्ष कुंडलिनी योग विज्ञान में दिखाई देता है। प्राणायाम और ध्यान के माध्यम से प्राणवायु को सुषुम्ना में प्रवेश कराया जाता है, जिससे ऊर्जा का प्रवाह चक्रों के माध्यम से मूलाधार तक पहुंचता है और कुंडलिनी जागरण की प्रक्रिया सक्रिय होती है।
सह वक्ता के रूप में महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के आयुर्वेद चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने कहा कि कुंडलिनी विज्ञान का मानव जीवन और स्वास्थ्य से अत्यंत गहरा संबंध है। कार्यक्रम की अध्यक्षता गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्कृत विद्यापीठ के आचार्य डॉ. प्रांगेश मिश्र की ओर से वैदिक मंगलाचरण से हुआ।
इस अवसर पर डॉ. रंगनाथ त्रिपाठी, बृजेश मणि मिश्र, डॉ. रोहित मिश्र, डॉ. दिग्विजय शुक्ल, डॉ. राकेश कुमार तिवारी, दीपनारायण, पुरुषोत्तम चौबे, शशिकुमार, योग प्रशिक्षक नवनीत चौधरी, कमलेश मौर्य, रवि सिंह, नित्यानन्द तिवारी आदि मौजूद रहे।