गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में 15 साल की उम्र में भी किशोरावस्था के लक्षण न दिखने का एक दुर्लभ मामला सामने आया है। बिहार निवासी किशोर की न तो लंबाई बढ़ रही है और न ही शरीर में किशोरावस्था से जुड़े बदलाव दिख रहे हैं। शरीर बेहद कमजोर है और वह छोटे बच्चे जैसा दिखता है। लगातार सुस्ती और कमजोरी के चलते परिजन काफी परेशान हैं।
तीमारदार किशोर को लेकर एम्स पहुंचे थे। प्रारंभिक जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे इंडोक्रायनोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डाॅ. देबादित्य दास के पास रेफर किया। विस्तृत परीक्षण और ब्रेन एमआरआई के बाद पता चला कि यह मल्टीपल पिट्यूटरी हार्मोन डिफिशिएंसी का मामला है, जो करीब 10 हजार में से किसी एक बच्चे में पाया जाता है। जांच में पता चला कि किशोर की पिट्यूटरी ग्रंथि का सही से विकास नहीं हुआ है। पिट्यूटरी ग्रंथि को ''''मास्टर ग्लैंड'''' भी कहा जाता है। यह मस्तिष्क के आधार पर मटर के दाने के आकार की एक छोटी ग्रंथि है। यह ग्रंथि शरीर के विकास, चयापचय, रक्तचाप, प्रजनन और पानी के संतुलन जैसे कई महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करती है। यह अन्य अंत स्रावी ग्रंथियों (जैसे थायराइड और अधिवृक्क) को हार्मोन बनाने और स्रावित करने का निर्देश देती है, जिससे शरीर के सभी अंगों और कार्यों में संतुलन बना रहता है। इस बीमारी में कम लंबाई और कम वजन, शारीरिक विकास (जैसे पलटना, बैठना, चलना) में देरी, हाथ-पैरों के अनुपात में गड़बड़ी, कमजोरी, थकान, यौवन के लक्षण देर से आना, भूख व नींद में बदलाव, व्यवहार और सीखने-समझने में दिक्कत जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं।
डॉ. देबादित्य दास ने बताया कि किशोर के ब्रेन का एमआरआई करने के बाद यह पुष्टि हुई कि उसकी पिट्यूटरी ग्रंथि सही से विकसित नहीं हुई है। यह स्थिति आनुवंशिक कारणों से हो सकती है। समय पर इलाज न होने पर लंबाई और किशोरावस्था में देरी के साथ अन्य जटिलताएं बढ़ सकती हैं। फिलहाल किशोर का इलाज थायराइड और कोर्टिसोल दवाओं से शुरू किया गया है और आगे रिकॉम्बिनेंट ग्रोथ हार्मोन की आवश्यकता होगी।