गोरखपुर। ईरान के सुप्रीम लीडर रहबर-ए-मोअज्जम और विश्व शिया समुदाय के नायब-ए-इमाम की शहादत पर रविवार को शहर के इमामबाड़ा अशरफुन्निशा खानम, शेखपुर स्थित शिया जामा मस्जिद परिसर में शोकसभा का आयोजन किया गया। सभा में शिया व सुन्नी समुदाय के लोगों के साथ बड़ी संख्या में अन्य नागरिक मौजूद रहे।
शिया जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना शमशाद अब्बास ने घटना को पूरी इंसानियत के लिए बड़ी क्षति बताया। उन्होंने कहा कि यह शहादत अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष की परंपरा को दोहराती है। इतिहास गवाह है कि अत्याचार के आगे झुकने के बजाय सिद्धांतों के लिए बलिदान देने वालों की संख्या भले कम रही हो लेकिन उनका संदेश हमेशा जीवित रहता है।
सभा में कर्बला की घटना का उल्लेख करते हुए कहा गया कि जिस प्रकार अपने दौर की ताकतों के सामने झुकने के बजाय बलिदान का मार्ग चुना था, उसी परंपरा की याद आज फिर ताजा हुई है। वक्ताओं ने शहादत को त्याग, साहस और सत्य पर अडिग रहने का प्रतीक बताया। आखिर में उनकी मगफिरत के लिए दुआ की गई। कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
शोकसभा में हाजी सैय्यद जाफर, सैय्यद नदीम हैदर, मौलाना रिजवान हैदर, अली हैदर, सैय्यद ताहिर अली, सैय्यद मोहम्मद रजा, रिजवान अब्बास, सैय्यद शाहनवाज आदि लोग उपस्थित रहे।