शौचालयों के निर्माण में लापरवाही पर सख्ती के बाद कर्मचारियों-अधिकारियों सुस्ती कम हुई है। दो महीने में 60 हजार शौचालयों की जियो टैगिंग (निर्माण के बाद फोटो) हो चुकी है, मगर अब भी पंचायतीराज विभाग के सामने 1.32 लाख शौचालय का निर्माण चुनौती है। इनमें कुछ में थोड़ा तो कुछ में आधे से ज्यादा काम बाकी है।
विभाग तो सभी शौचालयों का निर्माण पूरा मानते हुए करीब डेढ़ साल पहले ही जिले को ओडीएफ भी घोषित कर चुका है। मगर, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत जियो टैगिंग करने के बाद ही शौचालयों का निर्माण पूरा माना जाएगा। यही वजह रही कि 90 फीसदी से कम जियो टैगिंग पर डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने पांच नवंबर को ही जिले के सभी 20 एडीओ पंचायत और 1139 ग्राम पंचायतों से जुड़े 269 पंचायत सचिवों का वेतन रोक दिया था जो अभी जारी नहीं किया गया है।
एडीओ पंचायत और पंचायत सचिवों पर सख्ती के साथ ही डीएम ने पिछले महीने 500 से अधिक शौचालयों की जियो टैगिंग नहीं करने वाले 35 गांवों के प्रधानों को भी नोटिस भेजा था। इनमें चरगांवा के सर्वाधिक 12, जंगल कौड़िया, खजनी, खोराबार, पिपरौली, उरुवां, पिपरौली, बांसगांव व भटहट ब्लाक के एक, भरोहिया के पांच, ब्रह्मपुर के चार, पिपराइच व सहजनवां के दो तथा सरदारनगर ब्लाक के तीन गांव शामिल हैं।
इस सख्ती का नतीजा यह हुआ कि कुल 1.92 लाख शौचालयों में से अब तक 62 हजार शौचालयों की जियो टैगिंग का काम पूरा हो गया। पंचायतीराज विभाग के मुताबिक लगातार मानीटरिंग की जा रही है। जल्द ही बाकी शौचालयों के जियो टैगिंग का भी काम पूरा हो जाएगा।