वर्ष 1988 में बालिग होने की उम्र 18 साल तय की गई, लेकिन 31 साल बाद भी जेल के नियम कायदे आज भी पुराने ही हैं। इसका फायदा बालिग हो चुके वे बंदी उठा रहे हैं जिनकी उम्र 18 से 21 साल तक की है। बड़ी बात यह है कि समय के साथ जेल मैनुअल में इस नियम में बदलाव के लिए न तो कोई पहल हुई है और ना ही किसी ने ध्यान दिया है।
देश के कानून के अनुसार, 18 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों को बालिग माना जाता है। किसी अपराध में पुलिस इस उम्र (18-21) वालों को बालिग मानकर जेल भेजती है, लेकिन जेल मैनुअल के मुताबिक ये अवयस्क हैं और इनके लिए अलग बैरक होता है। इनके साथ आम बंदियों की तरह व्यवहार नहीं किया जाता, बल्कि बाल सुधार गृह की तरह ही सुधारने की कोशिश की जाती है। वर्तमान में जेल में इस तरह के 84 बंदी हैं।
जेल मैनुअल के मुताबिक, 18 से 21 वर्ष की उम्र के लोगों को अल्पवयस्क की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसा नहीं है कि यह कोई नया कानून बनाया गया है। दरअसल, पहले वयस्क होने की उम्र 21 साल हुआ करती थी। तब से बने जेल मैनुअल में बदलाव नहीं किया गया है। यही परंपरा तभी से चली आ रही है। ऐसे में गंभीर अपराध में पकड़े जाने के बावजूद यह नाबालिग बंदियों को दी जाने वाली सुविधाओं का फायदा जेल जाने के बाद भी उठाते हैं। जबकि जेल भेजने के पीछे उद्देश्य ही यही होता है कि इन्हें सजा दी जाए ताकि सुधार हो सके। जेल मैनुअल अलग होने की वजह से जेल में इन्हें खेलने की सुविधा तो दी ही जाती है, साथ ही अन्य बंदियों से अलग रखकर कोई काम भी नहीं लिया जाता।