कोरोना के मामलों में कमी आने के बाद यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए परिवहन निगम की ओर से सरेंडर की गई सभी 54 बसों को फिर रोडवेज के बेड़े में शामिल कर लिया गया है।
कोरोना कर्फ्यू के दौरान भले ही रोडवेज बसों का संचालन होता रहा, लेकिन लगातार कम होते यात्रियों की संख्या से निगम को बड़े घाटे का सामना करना पड़ रहा था।
अप्रैल और मई के महीने में यात्रियों की संख्या कम होने से निगम को हर महीने करीब 50 से 60 लाख रुपये का नुकसान होता रहा। ऐसे में इस घाटे को कम करने के लिए रोडवेज ने गोरखपुर परिक्षेत्र की अपनी 770 बसों में से 54 बसों को सरेंडर कर दिया था। लेकिन अब जब स्थितियां सामान्य हो रही है और यात्रियों की संख्या भी बढ़ गई है तो शुक्रवार को रोडवेज ने सरेंडर 35 बसों को बेड़े में शामिल करते हुए फिर से सड़क पर उतार दिया है। 10 दिनों पूर्व 19 सरेंडर बसें रोडवेज में शामिल कर ली गई थी।
आय में आई थी 65 प्रतिशत की गिरावट
क्षेत्रीय प्रबंधक पीके तिवारी ने बताया कि गोरखपुर परिक्षेत्र के आठ डिपो से संचालित हो रही रोडवेज की बसों से प्रतिदिन करीब एक करोड़ रुपये की आय होती है। लेकिन कोरोना के कारण अप्रैल और मई माह से यात्रियों की घटती संख्या से रोडवेज की आय घटकर प्रतिदिन करीब 35 से 40 लाख रुपये हो गई। इससे रोडवेज को काफी नुकसान हो रहा था। खड़ी बसों का टैक्स न देना पड़े इसलिए अब बसों को सरेंडर किया गया।
क्षेत्रीय प्रबंधक गोरखपुर परिक्षेत्र पीके तिवारी ने बताया कि कोरोना संक्रमण की रफ्तार कम होने से बसों में यात्रियों की संख्या भी लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में गोरखपुर परिक्षेत्र की सभी 54 बसों को फिर से रोडवेज के बेड़े में शामिल कर लिया गया है।