कोरोना जांच करता स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो)
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कोरोना से मृत्य दर अभी मात्र 1.44 फीसदी है। ज्यादातर लोग स्वस्थ हो रहे हैं। लेकिन इसे हल्के में लेने की भूल नहीं करनी होगी। अगर किसी में लक्षण है या वह संक्रमित के संपर्क में रहा है तो खुद जांच के लिए आगे आए। तभी संक्रमण की चेन टूटेगी। स्वास्थ्य महकमें इस अपील के साथ ही जांच का दायरा बढ़ाकर रोजाना 5000 करने का लक्ष्य रखा है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ श्रीकांत तिवारी ने बताया कि कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने में अधिकाधिक जांच काफी मददगार साबित होगी। जिले में प्रयास है कि प्रतिदिन कम से कम 5000 लोगों की कोरोना जांच करवाई जाए। शीघ्र ही इस लक्ष्य को प्राप्त कर लिया जाएगा।
प्रत्येक अधीक्षक और प्रभारी चिकित्साधिकारी को निर्देश दिया गया है कि वह अपने क्षेत्र में कांटैक्ट ट्रेसिंग, ज्यादा से ज्यादा सैंपलिंग और होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों की निगरानी पर जोर दें।
उन्होंने कहा कि बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए और मरीजों की मदद के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) टीम, आशा कार्यकर्ता, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता क्षेत्रों में दिन रात प्रयत्नशील हैं। इन लोगों के प्रति तिरस्कार या भेदभाव की भावना नहीं होनी चाहिए। इनका खुले दिल से स्वागत होना चाहिए। अंग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ता बीमारी की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जिनको सामाजिक सहयोग मिलना आवश्यक है। समाज को अपना नजरिया बदलना होगा।