परफार्मेंस ग्रांट पाने वाले गोरखपुर जिले के भटहट ब्लाक के जंगल हरपुर की ग्राम निधि के खाते से गुरुवार को एक साथ एक ही फर्म को 47 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। पंचायत सचिव नागेंद्र देव पांडेय का कहना है कि बिना उनकी जानकारी के यह रकम निकाल ली गई है। उन्होंने इसकी शिकायत एडीओ पंचायत और विभाग के उच्चाधिकारियों से भी की है।
वहीं गांव की महिला प्रधान कृति देवी और उनके प्रतिनिधि दिनेश अभी इस मामले में ज्यादा कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। प्रधान प्रतिनिधि का कहना है कि सचिव से उनकी बात नहीं हो पा रही है। बात करके ही कुछ बता पाएंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बिना प्रधान और सचिव का डोंगल लगे रुपयों का भुगतान हो ही नहीं सकता।
मामला सामने आने के बाद से ही ब्लाक मुख्यालय पर हड़कंप है। परेशान सचिव की सूचना पर एडीओ पंचायत एवं खंड विकास अधिकारी भी सकते में आ गए हैं। भुगतान की गई धनराशि को रोकने के लिए बीडीओ ने संबंधित बैंक के साथ ही बैंक के जोनल मुख्यालय को पत्र भेजा है।
सफाई कर्मी की पत्नी की फर्म को किया भुगतान
परफार्मेंस ग्रांट में चयनित ग्राम पंचायत के खाते में शासन की तरफ से बहुत पहले ही पहली किस्त के रूप में 50 लाख रुपये भेज दिए गए थे। सीडीओ द्वारा ग्राम पंचायतों में नियमानुसार टेंडर प्रक्रिया पूरी करने के बाद धनराशि को खर्च करने का निर्देश दिया गया है। गंभीर बात यह कि ग्राम पंचायत जंगल हरपुर, परफार्मेंस ग्रांट पाने वाली उन 20 ग्राम पंचायतों में शामिल है, जिनकी कार्ययोजना पर गुरुवार को डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने स्वीकृति प्रदान की और चंद घंटे के भीतर एक ही फर्म को 47 लाख का भुगतान हो गया।
पंचायत विभाग के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक जंगल हरपुर के पंचायत खाते से जिस फर्म को भुगतान किया गया, उस फर्म की संचालक चरगावां ब्लॉक में तैनात एक सफाई कर्मचारी की पत्नी है।
प्रधान-सचिव का डोंगल एक साथ लगने पर ही हो सकता है भुगतान
पीएफएमएस से भुगतान के लिए प्रधान और सचिव को अलग-अलग डोंगल दिए गए हैं। दोनों का डोंगल लगाने पर ही भुगतान हो सकता है। पंचायत सचिव चेकर होते हैं जबकि प्रधान मेकर। पहले सचिव का डोंगल लगता है फिर प्रधान का।
पंचायत सचिव नागेंद्र देव पांडेय ने बताया कि मंगलवार से ही पीएफएमएस सर्वर काफी धीमा है। सर्वर नहीं चलने के कारण कंप्यूटर ऑपरेटर ने डोंगल रख लिया था। सभी कंप्यूटर ऑपरेटर कार्य बहिष्कार पर हैं। इसी दौरान डोंगल का दुरुपयोग किसी व्यक्ति ने कर लिया। मामले की जानकारी एडीओ पंचायत और बीडीओ को दे दी है।
एडीओ पंचायत सुनील कुमार यादव ने बताया कि सचिव द्वारा फर्जी भुगतान की सूचना दी गई है। भुगतान को रोकने के लिए बैंक को तत्काल पत्र भेज दिया गया है। मामले से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है।
डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर ने बताया कि डोंगल पंचायत सचिव का सिग्नेचर है। सचिव और प्रधान दोनों का डोंगल इस्तेमाल कर ही भुगतान किया जा सकता है। अगर सचिव ने डोंगल किसी ऑपरेटर को दे दिया था तो यह भी अपराध है। मामले की जांच कराई जाएगी। दोषी पाए जाने पर सचिव और प्रधान पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। ऑपरेटर के पास डोंगल होने की पुष्टि हुई तो उसपर भी मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।