मुख्यमंत्री का जिला होने के बाद जीडीए उपाध्यक्ष के जल्दी-जल्दी तबादलों का सिलसिला थमने की उम्मीद थी। लोगों को उम्मीद थी कि वीसी को शहर समझने और विकास का काम करने का मौका मिलेगा। मगर, साढ़े चार साल में ही पांच उपाध्यक्ष बदले जा चुके। 30 जून 2017 में जीडीए के तत्कालीन उपाध्यक्ष ओएन सिंह के तबादले के बाद एक जुलाई 2017 को उपाध्यक्ष बने वैभव श्रीवास्तव का ठीक नौ महीने में तबादला हो गया।
इसके बाद 23 अप्रैल 2018 को आए अमित सिंह बंसल एक साल तीन महीने तक टिके और दो जुलाई 2019 को उनका भी तबादला हो गया। उनके बाद छह जुलाई 2019 को पदभार संभालने के छह महीने में ही दिनेश कुमार का भी तबादला हो गया। तीन जनवरी 2020 को गोरखपुर के ही सीडीओ पद से प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बने अनुज सिंह का भी कार्यकाल 14 फरवरी 2021 तक रहा। 15 फरवरी 2021 को प्रयागराज के सीडीओ पद से उपाध्यक्ष बनाए गए आशीष कुमार का भी रविवार की देर रात तबादला हो गया।
आईएएस भी नहीं टिक सके
पीसीएस ही नहीं आईएएस अफसर भी इस कुर्सी पर साल-सवा साल से अधिक समय तक नहीं जमे रह सके। पिछले नौ साल में 11 आईएएस अफसरों के तबादले इसकी गवाही दे रहे रहे हैं। वर्ष 2012 से अभी तक जीडीए में कुल 13 उपाध्यक्ष बदले। इनमें से 11 आईएएस थे। इस दौरान सिर्फ दो पीसीएस अफसर डीएस उपाध्याय और एके तिवारी ही इस पद पर तैनात रहे, जबकि 11 आईएएस को जिम्मेदारी सौंपी गई।
करीब दो दशक के बीच जीडीए की तरफ से सबसे ज्यादा योजनाएं पूर्व उपाध्यक्ष शिव श्याम मिश्रा के कार्यकाल (25 जुलाई 2014 से 29 मार्च 2016) में लांच हुई। इनमें वसुंधरा फेज 1, 2 और तीन, अमरावती निकुंज, लोहिया फेज एक, कार्पोरेट चैंबर, वैशाली आदि शामिल है। उन्होंने शहर में जीडीए के जीर्णशीर्ण पार्कों को फिर से जिंदा कराया। सभी पार्कों की मरम्मत के साथ ही उनका सुंदरीकरण भी हुआ।
ऑफिस अभिशप्त? ... ईश्वर आपकी मदद करें
नगर निगम से निकलकर वर्ष 2004 में जब जीडीए कार्यालय, देवरिया बाईपास स्थित अपनी नई इमारत में शिफ्ट हुआ तो उसके बाद ही दो-तीन कर्मचारियों की बहुत कम समयांतराल पर मृत्यु हो गई। उनके मौत की वजह जो भी रही हो, मगर इसे लेकर उस समय एक ऐसी भ्रांति फैली की पूरा जीडीए चर्चा में आ गया। तत्कालीन कर्मचारियों-अभियंताओं के बीच यह चर्चा आम थी कि वहां अदृश्य शक्तियों का वास है। भय का माहौल बन गया था।
किसी की सलाह पर कर्मचारियों ने तत्कालीन उपाध्यक्ष और सचिव से पूजा कराने का अनुरोध किया। बहुत सिफारिश पर तत्कालीन डीएम डॉ. हरिओम से पूजा की अनुमति के लिए प्राधिकरण की तरफ से प्रार्थना पत्र भेजा गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक डॉ. हरिओम ने जब उसे पढ़ा तो मुस्कुराए और प्रार्थनापत्र पर सिर्फ इतना लिखकर उसे लौटा दिया कि - ईश्वर आपकी मदद करें। किसी भी उपाध्यक्ष के लंबे समय तक नहीं टिक पाने की वजहों पर अभी भी प्राधिकरण के कुछ कर्मचारी तर्कसंगत कोई वजह बता पाने की बजाय यही कहते सुने जाते हैं कि सब कार्यालय की इमारत का ही दोष है।