सीएमओ ने बताया कि विभाग में अब तक अस्पतालों का पंजीकरण मैनुअल तरीके से होता है। इसके लिए कोई अलग पोर्टल नहीं विकसित किया गया था। लेकिन, अब एमबीबीएस के पंजीकरण नंबर को अस्पतालों के पंजीकरण के एक्सल शीट में जोड़ा जाएगा। इससे एक क्लिक में डॉक्टरों की पूरी जानकारी हो सकेगी। इससे गड़बड़झाला रूकेगा और झोलाछाप अवैध रूप से अस्पताल नहीं चला सकेंगे।
निजी अस्पतालों को मिलेगा 15 दिन का मौका
सीएमओ ने बताया कि जिन अस्पतालों में डॉक्टर नहीं होंगे। उन्हें 15 दिन का मौका दिया जाएगा। इस दौरान उन्हें अपने सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। पंजीकरण के लिए एमबीबीएस डॉक्टर अनिवार्य है। इसके लिए डॉक्टरों का शैक्षणिक प्रमाणपत्र लाना होगा। साथ ही शपथपत्र के साथ डॉक्टर की भी उपस्थिति रहेगी। बिना उनकी उपस्थिति के पंजीकरण नहीं किया जाएगा।
दूसरे डॉक्टरों के यहां परिक्रमा शुरू
35 डॉक्टरों के नाम वापस लेने के बाद अस्पताल संचालक अब दूसरे डॉक्टरों के यहां परिक्रमा करना शुरू कर दिए हैं। इसके लिए वह डॉक्टरों को अच्छी खासी रकम देने के लिए भी तैयार है। हालांकि, डॉक्टर मामले को देखते हुए अभी हामी नहीं भर रहे हैं। इसकी वजह से इनके अस्पताल संचालन में मुश्किलें खड़ी होने वाली है।