इस पत्र में साफ तौर पर लिखा गया है कि विलय के लिए एजेंसी की ओर से नामित बैंकों की सूची दी जा रही है। इस सूची में सबसे ज्यादा पडरौना की 32 और खलीलाबाद की 28 शाखाओं का जिक्र है। जबकि, गोरखपुर की 19 शाखाएं शामिल हैं। इसे लेकर नेशनल फेडरेशन ऑफ आरआरबी इंप्लायर्स एवं उप्र स्टेट ग्रामीण बैंक एंप्लाइज एवं ऑफिसर्स फेडरेशन के पदाधिकारियों ने विरोध जताया है। उन्होंने फैसले को वापस लेने की मांग की है।
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चेयरमैन बड़ौदा यूपी बैंक सचिव प्रेम कुमार सिंह ने कहा कि व्यवसाय को लेकर एक अध्ययन कराया जा रहा है। आरबीआई की गाइडलाइन के मुताबिक ही निर्णय ले सकते हैं। बैंक के लिए ग्राहकों का हित सर्वोपरि है। शाखाओं की लाभ-हानि के अध्ययन की रिपोर्ट शाखा प्रबंधकों से मांगी गई है। इसका मतलब यह नहीं है कि बैंक को बंद करने या विलय करने की प्रक्रिया है। अध्ययन रिपोर्ट आने के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।