जमीन के व्यावसाय में कमाई बढ़ी तो कुछ जमीन कारोबारियों ने भी कोलकाता में मूल खातेदारों से संपर्क साधना चाहा। ज्यादातर को तो निराशा मिली लेकिन एक-दो सफल हुए। उन्होंने वहां से पावर ऑफ अटॉर्नी लेकर जमीन की बिक्री शुरू कर दी। उधर लेखपालों की टीम को जब मूल खातेदार नहीं मिले तो उसी आधार पर एसडीएम सदर ने 2019-20 में जमीन को लावारिस घोषित कर दिया। इसके बाद इसे नगर निगम को एक साल के लिए आवंटित कर दिया गया। मगर आठ महीने ही बीते थे कि जमीन को वेटरिनरी कॉलेज के नाम आवंटित कर दिया गया।
जगह कम पड़ने की वजह से वहां कॉलेज का निर्माण नहीं हुआ मगर इसी बीच मई 2022 में तहसीलदार न्यायिक ने अचानक जमीन की वरासत कर दी। मामला डीएम कृष्णा करूणेश तक पहुंचा तो उन्होंने जुलाई में इस जमीन को उद्यान विभाग के नाम दर्ज कर दिया।
डीएम कृष्णा करूणेश ने कहा कि जंगल डुमरी नंबर दो की 26 एकड़ जमीन के वरासत मामले की जांच की जिम्मेदारी सीआरओ एसके गोंड और एडीएम सिटी विनीत कुमार सिंह को दी गई है। कमेटी को दो दिनों में रिर्पोट देने का निर्देश दिया गया है।