चोरी या फिर भी किसी भी आपराधिक मामले में पकड़े गए नाबालिगों (18 वर्ष से कम उम्र) को बाल सुधार गृह भेजा जाता है। इसका उद्देश्य होता है कि यहां पर रखकर बच्चों को सुधारा जाए, ताकि फिर बाहर जाकर वे अपराध न करें और एक सभ्य व्यक्ति की जिंदगी जी सकें। लेकिन, गोरखपुर के बाल संप्रेक्षण गृह में जिस तरह से बाल अपचारी मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे थे। इससे क्या वे बाल संप्रेक्षण गृह में आकर सुधर पाएंगे, यह एक बड़ा प्रश्न है।
स्क्रू खोलकर बोर्ड और दीवार में छिपाए थे मोबाइल
एसपी सिटी के मुताबिक, बाल अपचारियों ने मोबाइल फोन को इस तरह से छिपाया था कि उसे आसानी से पकड़ पाना संभव नहीं था। स्विच बोर्ड के स्क्रू को खोलकर मोबाइल फोन को अंदर रखकर फिर से स्क्रू लगा देते थे। दूसरे अलमारी के अंदर जहां से तार गुजरा था, वहां पर दीवार को तोड़कर तार से चार्जर कनेक्ट किए थे। दीवार में इस तरह से होल किए थे कि उसके अंदर मोबाइल फोन रखकर बाहर से ईंट रखी जा सके। ताकि देखने से लगे कि दीवार टूटी हुई है।
एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि बाल संप्रेक्षण गृह में जांच के दौरान 22 मोबाइल फोन और चार्जर बरामद किए गए हैं। मोबाइल फोन को छिपाकर रखा गया था। सभी मोबाइल फोन चालू हालत में हैं।