सोने के काले कारोबार ( कच्चा सोना) में शामिल व्यापारी कोरोना काल की तरह फिर नोट खपाने का इंतजार कर रहे हैं। जीएसटी सूत्रों की मानें तो ये कारोबारी सितंबर तक दो हजार रुपये के नोट लेने से परहेज कर रहे हैं।
दरअसल, नोटबंदी के समय सोने का भाव 30 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम था। नोटबंदी के बाद 60 हजार रुपये से 65 हजार रुपये तक कच्चा सोना प्रति 10 ग्राम बेचा गया था।
जीएसटी के सूत्रों ने बताया कि सराफा कारोबारी अभी अपने पास जमा धन को सोने में नहीं खपाएंगे। ऐसा इसलिए कि 30 सितंबर के आस-पास सोने के भाव से दोगुने दाम पर दो हजार रुपये के नोट पर कच्चा सोना खरीदा जा सकता है। उधर, सराफा सूत्रों ने बताया कि अभी कच्चा सोना बाजार में उपलब्ध नहीं हो रहा है। अगर दुकानदार कच्चे सोने की मांग कर रहे तो उसके बदले छोटे नोट को प्राथमिकता दी जा रही है।
दिल्ली सराफा बाजार में शनिवार को बैंक सोना (पक्का, जिसकी खरीद रिकार्ड में हो) से 10 हजार रुपये बढ़ाकर कच्चे सोने (तस्करी) का भाव खोला गया था। सामान्य दिनों में बैंक सोने के भाव से तीन प्रतिशत कम (जीएसटी छोड़कर) के दाम में कच्चे सोने के भाव होता है। लेकिन, शहर के भाव में बदलाव नहीं आया।
जानकार बताते हैं कि सराफा बाजार में अभी कच्चे सोने को लोग नहीं निकाल रहे हैं। इसके अलावा कोलकाता और नेपाल से आने वाले तस्करी के सोने को भी रोक कर रखा गया है। उनका कहना है कि अभी बैंक में दो हजार रुपये जमा करने का विकल्प है। इसके अलावा आसानी से व्यापारी दो हजार रुपये के नोट बैंक में खपा सकते हैं। ऐसे में दो हजार रुपये के नोट से कच्चे सोने की खरीददारी से वो खुद चर्चा में आ जाएंगे। इसके अलावा उन्हें अभी मनमाना दाम भी कच्चे सोना का नहीं मिल पा रहा है।
आंकड़ा: सोना
बैंक भाव- 61 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम
अवैध सोने का खोला गया भाव- 71 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम
कच्चा सोना- जीएसटी भुगतान किए और बिना हालमॉर्किंग वाला सोना
पक्का सोना- जीएसटी भुगतान के साथ बैंक दर से घोषित होने वाला प्रतिदिन का सोना