गोरखपुर। गर्भावस्था में लापरवाही महिलाओं को हाई बीपी की मरीज बना रही है। इसका असर किडनी पर भी पड़ रहा है और यूरिन से प्रोटीन की मात्रा ज्यादा निकल रही है। हाई बीपी में दवा खाने को लेकर फैली भ्रांति के कारण दिक्कत बढ़ती जा रही है।
एम्स के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की डॉ. आराधना सिंह ने बताया कि ओपीडी में आने वाली गर्भवती में से 20 प्रतिशत हाई बीपी और यूरिन में प्रोटीन निकलने की समस्या से पीड़ित हैं। हाई बीपी और यूरिन से प्रोटीन निकलने के कारण गर्भ में पल रहे बच्चे में खून का प्रवाह सही से नहीं हो पाता है। यह स्थिति गर्भवती महिलाओं के लिए भी नुकसानदेह होती है। इसे प्रीक्लेम्पसिया कहते हैं।
उन्होंने बताया कि जिन गर्भवती महिलाओं को हाई बीपी की दिक्कत है उनमें खून का प्रवाह सही नहीं रहता है। अल्ट्रासाउंड जांच में पता चलता है कि हाई बीपी की वजह से गर्भस्थ शिशु में भी खून का प्रवाह अच्छा नहीं है। कोशिकाओं में सिकुड़न भी मिलती है। इस कारण गर्भस्थ शिशु का विकास ठीक नहीं होता है। समय से उपचार न हो तो व तो बच्चे की जान चली जाती है।
डॉ. आराधना सिंह ने बताया कि प्रीक्लेम्पसिया गर्भावस्था के समय होने वाली एक गंभीर स्थिति है। इसमें महिला का रक्तचाप बढ़ जाता है और मूत्र में प्रोटीन आने लगता है। यह अक्सर गर्भावस्था के 20वें सप्ताह के बाद होता है। गर्भावस्था की शुरुआत होते ही महिलाओं को विशेषज्ञ से संपर्क कर खून, पेशाब के साथ ही रक्तचाप की जांच समय-समय पर करवानी चाहिए।