फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बेआसरा का आसरा: आसरा आवास में भूख-प्यास से तड़प रहे थे 2 बुजुर्ग, आखिरी वक्त में पहुंचे संवेदना के हाथ

Tue, 07 Jul 2026 11:59 AM IST
Rohit Singh संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती

सार

हर्रैया क्षेत्र के गांधी नगर वार्ड स्थित आसरा आवास में दो बेआसरा बुजुर्ग कई दिनों से भूखे-प्यासे कमरे में पड़े थे। सोमवार को पड़ोसियों की सूचना पर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची। गंभीर हालत में दोनों बुजुर्गों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों ने अगले 24 घंटे को बेहद संवेदनशील बताया है।
विज्ञापन
बुजूर्ग मूलचंद और सीमा की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

क्षेत्र के गांधी नगर वार्ड में स्थित आसरा आवास में बेआसरा पड़े दो बुजुर्गों को आखिरी वक्त में नई जिंदगी की उम्मीद मिल गई। सोमवार को पड़ोसियों को इन बुजुर्गों की याद आई तो पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची तो पता चला कि दोनों बुजुर्ग कई रोज से कमरे में भूखे-प्यासे पड़े हैं, हालत ऐसी कि बिस्तर से उठना भी मुश्किल हो गया है।

विज्ञापन


गंभीर स्थिति में दोनों बुजुर्गों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। गांधी नगर में खाली पड़े आसरा आवास में बेठिकानों ने ठिकाना बना लिया है। इसी आवास में भूतल पर पहले कमरे में छावनी क्षेत्र के शक्तिपुर निवासी मूलचंद पांडेय और तीसरे कमरे में बुजुर्ग सीमा भी सात-आठ साल से रहती आ रही हैं।

पड़ोसियों के मुताबिक मूलचंद ने साल 1983 में गांव की जमीन-जायदाद बेच दी थी। उन्होंने हर्रैया में पान की गुमटी खोली और कस्बे में ही रहने लगे। वहीं, अचेतावस्था में मिलीं सीमा के मुताबिक कस्बे का रहने वाला दिलीप नाम का शख्स उन्हें ब्याह कर लाया था। पति की मौत के बाद वह बेसहारा हुईं तो आसरा आवास में रहने लगीं।

जब तक शरीर ने साथ दिया मूलचंद और सीमा रोटी-कपड़े का इंतजाम करते रहे। बीते करीब एक साल से उम्र हौसले पर हावी होने लगी तो बाहर निकलना कम हो गया और दोनों अपने-अपने कमरे में ही रहने लगे। पड़ोस में रहने वाले जितेंद्र और उनकी पत्नी श्यामा दोनों बुजुर्गों को वक्त-बेवक्त भोजन-पानी दे दिया करते थे।

जितेंद्र के मुताबिक बीते शनिवार से दोनों बुजुर्ग नहीं दिखे। सोमवार को वह मूलचंद के कमरे के बाहर पहुंचे और आवाज दी तो जवाब मिला कि तबीयत ज्यादा खराब है बिस्तर से दरवाजे तक नहीं आ पाएंगे। वहीं सीमा को आवाज देने पर कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद जितेंद्र ने एक गैर सरकारी संगठन चलाने वाले दिलीप को फोन पर सूचना देकर मदद मांगी।

अगले 24 घंटे बेहद संवेदनशील
दिलीप की सूचना पर कस्बे के रहने वाले उमंग पांडेय, योगेश कसेरा, सीएचसी हरैया के अधीक्षक डॉ. अभय सिंह और पुलिसकर्मी धर्मेंद्र कुमार यादव एम्बुलेंस के साथ मौके पर पहुंचे भीतर से बंद बुजुर्गों के कमरे किसी तरह खोले गए।
विज्ञापन

भूख-प्यास से बेहाल और चलने-फिरने में लाचार हो चुके बुजुर्ग बिस्तर पर गंदगी में पड़े हुए थे। डॉक्टर अभय सिंह के मुताबिक, लंबे समय से भूखे-प्यासे रहने के कारण दोनों के शरीर के कई अंगों ने काम करना कम कर दिया है और अगले 24 घंटे बेहद संवेदनशील हैं।

आसरा आवास में मिले दोनों बुजुर्गों की हालत काफी खराब थी। इन लोगों के बारे में पूर्व में कोई सूचना नहीं थी। इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इलाज के बाद इनके भोजन आदि की व्यवस्था कराई जाएगी: उमाकांत तिवारी, एसडीएम हर्रैया
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें