पड़ोसियों के मुताबिक मूलचंद ने साल 1983 में गांव की जमीन-जायदाद बेच दी थी। उन्होंने हर्रैया में पान की गुमटी खोली और कस्बे में ही रहने लगे। वहीं, अचेतावस्था में मिलीं सीमा के मुताबिक कस्बे का रहने वाला दिलीप नाम का शख्स उन्हें ब्याह कर लाया था। पति की मौत के बाद वह बेसहारा हुईं तो आसरा आवास में रहने लगीं।
जब तक शरीर ने साथ दिया मूलचंद और सीमा रोटी-कपड़े का इंतजाम करते रहे। बीते करीब एक साल से उम्र हौसले पर हावी होने लगी तो बाहर निकलना कम हो गया और दोनों अपने-अपने कमरे में ही रहने लगे। पड़ोस में रहने वाले जितेंद्र और उनकी पत्नी श्यामा दोनों बुजुर्गों को वक्त-बेवक्त भोजन-पानी दे दिया करते थे।
जितेंद्र के मुताबिक बीते शनिवार से दोनों बुजुर्ग नहीं दिखे। सोमवार को वह मूलचंद के कमरे के बाहर पहुंचे और आवाज दी तो जवाब मिला कि तबीयत ज्यादा खराब है बिस्तर से दरवाजे तक नहीं आ पाएंगे। वहीं सीमा को आवाज देने पर कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद जितेंद्र ने एक गैर सरकारी संगठन चलाने वाले दिलीप को फोन पर सूचना देकर मदद मांगी।
अगले 24 घंटे बेहद संवेदनशील
दिलीप की सूचना पर कस्बे के रहने वाले उमंग पांडेय, योगेश कसेरा, सीएचसी हरैया के अधीक्षक डॉ. अभय सिंह और पुलिसकर्मी धर्मेंद्र कुमार यादव एम्बुलेंस के साथ मौके पर पहुंचे भीतर से बंद बुजुर्गों के कमरे किसी तरह खोले गए।
भूख-प्यास से बेहाल और चलने-फिरने में लाचार हो चुके बुजुर्ग बिस्तर पर गंदगी में पड़े हुए थे। डॉक्टर अभय सिंह के मुताबिक, लंबे समय से भूखे-प्यासे रहने के कारण दोनों के शरीर के कई अंगों ने काम करना कम कर दिया है और अगले 24 घंटे बेहद संवेदनशील हैं।
आसरा आवास में मिले दोनों बुजुर्गों की हालत काफी खराब थी। इन लोगों के बारे में पूर्व में कोई सूचना नहीं थी। इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इलाज के बाद इनके भोजन आदि की व्यवस्था कराई जाएगी: उमाकांत तिवारी, एसडीएम हर्रैया