बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ राम कुमार जायसवाल ने बताया कि जिन मरीजों की इम्युनिटी (प्रतिरोधक क्षमता) कमजोर होती है, उन मरीजों में ब्लैक फंगस का खतरा अधिक रहता है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस को लेकर शिकायतें मिली हैं। ऐसे मामले की जांच की जा रही है। बताया कि यह म्यूकोरमाइकोसिस फंगस संक्रमण है, जो शरीर में तेजी से फैलता है।
यह संक्रमण नाक, आंख, कान, दिमाग और फेफड़ों के साथ स्किन पर भी असर डालता है। इस बीमारी से आंखों की रोशनी भी चली जाती है। साथ ही मरीजों के जबड़े और नाक की हड्डी भी गल जाती है। अगर ब्लैक फंगस जैसे लक्षण दिखते हैं तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें। यह घातक साबित हो सकता है।
आंख व नाक की नसें सूखने लगती हैं
मेडिकल कॉलेज में नेत्र रोग के विभागाध्यक्ष डॉ. राम कुमार जायसवाल ने बताया कि म्यूकोरमाइकोसिस में नाक और आंख के आसपास की नसों पर असर पड़ता है। नाक खुश्क हो जाती है। नाक की परत अंदर से सूखने लगती है। नाक के आसपास सूखी पपड़ियां जम जाती हैं। इसकी वजह से हड्डियां तक गलने लगती है। वहीं दूसरी ओर आंख की नसें भी सूखने लगती हैं। चेहरे की त्वचा सुन्न होने लगती है। चेहरा सूजने लगता है। आंखों की सेंट्रल रेटाइनल आर्टरी को ब्लॉक कर देता है। इसकी वजह से आंखों की रोशनी भी जा सकती है।
कोरोना मरीजों को दिखाई देने लगा कम
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड में कुछ मरीजों ने कम दिखाई देने की शिकायत की है। डॉ राम कुमार जायसवाल ने बताया कि ऐसे मरीजों की जांच की गई तो उनका शुगर काफी ज्यादा था। साथ ही उन्हें स्टेरॉयड भी दी जा रही है। उनका इलाज किया जा रहा है। पोस्ट कोविड वार्ड में जब उनकी जांच की जाएगी तो सही जानकारी मिल पाएगी कि उन्हें ब्लैक फंगस या नहीं।
संक्रमण से मुक्ति पा चुके लोगों के नाक में दर्द, नाक के रास्ते खून आना, नाक बंद हो जाना। दांत या जबड़े में दर्द, आंखों के सामने धुंधलापन, दोहरा दिखाई देना, गालों पर काले चक्कते, आंख के नीचे काले चक्कते पड़ना, चेहरे पर सूजन, कम दिखाई देना आदि लक्षण है।
स्वास्थ्य विभाग को मामले की जानकारी नहीं
गोरखपुर एसीएमओ डॉ एनके पांडेय ने कहा कि ब्लैक फंगस के एक भी मरीज की जानकारी नहीं है। निजी अस्पतालों में अगर ऐसे मरीज इलाज करा रहे हैं तो इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। जानकारी मिलने के बाद जरूरी कदम उठाया जाएगा।